सीजी भास्कर, 28 मई : छत्तीसगढ़ के गांवों और पंचायतों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। विष्णु देव साय सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। अब जिला पंचायतों को भी गौण खनिजों (जैसे रेत, गिट्टी, मुरम) से मिलने वाली रॉयल्टी (Minor Mineral Fund) का एक हिस्सा दिया जाएगा।
बात ज्यादा पुरानी नहीं है, राष्ट्रीय पंचायत दिवस के कार्यक्रम में रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से यह मांग की थी। मुख्यमंत्री ने भी मंच से तुरंत हामी भर दी थी, और महीने भर के भीतर सरकार ने इसका बकायदा ऑर्डर भी जारी कर दिया है।
समझिए, कमाई का बंटवारा कैसे होगा
गौण खनिजों से मिलने वाली कुल रॉयल्टी (Minor Mineral Fund) का 33 प्रतिशत हिस्सा पहले की तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के खाते में ही जाएगा, लेकिन असली बदलाव बाकी बचे 67 प्रतिशत हिस्से में हुआ है, जिसे अब तीनों स्तर की पंचायतों में बांटने का फैसला किया गया है। नए नियमों के मुताबिक यदि कुल राशि 7.50 लाख रुपये तक होती है तो उस पर पूरा अधिकार ग्राम पंचायत का होगा। इसके बाद जैसे-जैसे रकम का ग्राफ बढ़ेगा, हिस्सेदारी बदलती जाएगी। उदाहरण के लिए, 7.50 लाख से 10 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 80 प्रतिशत और जनपद व जिला पंचायत को 10-10 प्रतिशत मिलेगा।
इसी तरह 10 लाख से 25 लाख तक होने पर ग्राम पंचायत का हिस्सा 70 प्रतिशत और बाकी दोनों का 15-15 प्रतिशत हो जाएगा। जब यह फंड 25 लाख से 50 लाख रुपये के बीच होगा तो ग्राम पंचायत को 60 प्रतिशत और जनपद व जिला पंचायत को 20-20 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलेगी, जबकि 50 लाख रुपये से ऊपर की बड़ी राशि होने पर आधा यानी 50 प्रतिशत फंड ग्राम पंचायत को देकर बाकी का आधा हिस्सा जनपद और जिला पंचायत के बीच 25-25 प्रतिशत के रूप में बराबर-बराबर बांट दिया जाएगा।
इस पैसे से गांवों में क्या-क्या बदलेगा
सरकार ने पंचायतों को सिर्फ यह बजट ही नहीं सौंपा है, बल्कि गांवों की सूरत बदलने के लिए इसके इस्तेमाल का दायरा भी काफी बड़ा कर दिया है। अब इस विशेष फंड की मदद से गांवों के सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में चौबीसों घंटे चालू रहने वाली रनिंग वाटर यानी नल से जल की सुविधा सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण, मुक्तिधामों का कायाकल्प और गांवों को आपस में जोड़ने वाले पहुंच मार्गों का निर्माण तेजी से कराया जाएगा।
बच्चों और युवाओं के पढ़ने के लिए गांवों में ही आधुनिक वाचनालय यानी लाइब्रेरी भी तैयार की जाएंगी। इस पूरे फैसले में एक महत्वपूर्ण नीति यह भी जोड़ी गई है कि जिला पंचायतों को अपने हिस्से में मिलने वाली रकम को सबसे पहले उन ग्रामीण इलाकों और बसाहटों के विकास कार्यों में खर्च करना होगा, जहां माइनिंग या भारी खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण, सड़कों या आम जनजीवन पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ रहा है।
पंचायतों को मजबूत करना ही लक्ष्य है
इस फैसले पर मुहर लगाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साफ कहा कि गांवों का विकास तभी हो सकता है जब हमारी पंचायतें आर्थिक रूप (Minor Mineral Fund) से मजबूत हों। इस फैसले से अब स्थानीय स्तर पर काम तेज होंगे। जाहिर है, इस आदेश के बाद पंचायत प्रतिनिधियों के चेहरे खिले हुए हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से ग्रामीण विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी और पैसों के लिए अब रायपुर का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा।




