सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रेत माफिया (CG Sand Mining Protest) के हौसलों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सत्ता के गलियारों में एक ऐसा बड़ा सियासी और मानवीय धमाका हुआ है, जिसने पूरे बस्तर संभाग के रसूखदारों को हिलाकर रख दिया है। भानुप्रतापपुर क्षेत्र की बेलवापानी रेत खदान में चल रहे काले खेल को बेनकाब करने के लिए स्थानीय कांग्रेस विधायक सावित्री मंडावी ने खुद मोर्चा संभाल लिया। आम नागरिकों और पर्यावरण की रक्षा के लिए विधायक अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ देर रात तक खदान की ठंडी रेत पर धरने पर बैठी रहीं।
रसूखदार माफिया को बचाने के लिए प्रशासन घंटों टालमटोल करता रहा, लेकिन जब विधायक के आक्रामक तेवर और सस्पेंस बढ़ता गया, तो आखिरकार प्रशासनिक अमले को आधी रात को सरेंडर करना पड़ा। इस पूरी रात चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद (CG Sand Mining Protest) की गूंज अब राजधानी तक पहुंच चुकी है, क्योंकि यह लड़ाई सीधे तौर पर जल-जंगल-जमीन को बचाने की है।
दरअसल, यह मामला सिर्फ रेत निकालने का नहीं है, बल्कि बेलवापानी खदान में निर्धारित क्षेत्र की सीमाओं को लांघकर, नदियों का सीना चीरकर भारी-भरकम चैन माउंटेन मशीनों से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही थी। नियमों और पर्यावरणीय मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं, जिससे नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया था। जब ग्रामीणों की सिसकियां और शिकायतें विधायक तक पहुंचीं, तो उन्होंने बिना समय गंवाए सीधे ग्राउंड जीरो पर धावा बोल दिया। मौके पर पहुंचते ही विधायक ने देखा कि वहां करीब 14 हाइवा वाहन और एक विशाल चैन माउंटेन मशीन नदी को खोखला कर रही थी। उन्होंने तुरंत कलेक्टर और माइनिंग अफसरों को फोन घुमाया, लेकिन माफिया को भागने का मौका देने के लिए अफसरों ने कछुआ गति अपनाई। इस लचर व्यवस्था के खिलाफ कड़ा कदम (CG Sand Mining Protest) उठाते हुए विधायक वहीं डट गईं।
रात 1 बजे जब कांपते हुए पहुंचा अमला
पर्दे के पीछे का सस्पेंस यह है कि जब क्षेत्र की जनप्रतिनिधि खुद रात के अंधेरे में खदान में बैठी थीं, तब भी जिम्मेदार अधिकारी फोन बंद करके तमाशा देख रहे थे। करीब 6 घंटे के लंबे और तनावपूर्ण इंतजार के बाद, रात के ठीक 1 बजे प्रशासनिक टीम की गाड़ियां बत्तियां जलाते हुए मौके पर पहुंचीं। विधायक के उग्र तेवरों को देखकर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में चैन माउंटेन मशीन को सील करने और कुछ अवैध वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई की गई। विधायक सावित्री मंडावी ने साफ लहजे में आरोप लगाया कि प्रशासन और शासन के ऊंचे पदों पर बैठे कुछ मलाईदार लोगों की मिलीभगत के कारण ही कार्रवाई में जानबूझकर देरी की गई ताकि माफिया अपनी गाड़ियों को सुरक्षित निकाल सके। इस बड़ी लापरवाही से पर्यावरण को हुए नुकसान (CG Sand Mining Protest) की भरपाई कौन करेगा, यह सवाल अब भानुप्रतापपुर की जनता पूछ रही है।
विधायक ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि रेत का यह अवैध धंधा न केवल नदियों को सुखा रहा है, बल्कि भविष्य में पूरे बस्तर में एक भयानक जल संकट पैदा कर देगा। उन्होंने मांग की कि इस खदान को बाहरी बड़े ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त कराकर, तय सरकारी नियमों के अनुसार ही संचालित किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इस काम में स्थानीय ट्रैक्टर वाहन मालिकों और गरीब ग्रामीणों को प्राथमिकता दी जाए ताकि उनके परिवारों को दो वक्त की रोटी मिल सके। स्थानीय लोगों को रोजगार से दूर रखकर माफिया तंत्र में बदलाव (CG Sand Mining Protest) करने की इस कोशिश को विधायक ने पूरी तरह नाकाम कर दिया है, जिसे अब ग्रामीण विकास का एक बड़ा जरिया माना जा रहा है।
‘अगर रेत चोरी नहीं रुकी, तो पूरा कांकेर चक्काजाम होगा’
खदान से सीधे तौर पर निकले इस प्रशासनिक हंटर ने साफ कर दिया है कि बस्तर की जनता अब अपने प्राकृतिक संसाधनों की लूट को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी। विधायक सावित्री मंडावी ने अधिकारियों को दोटूक अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी। अगर इस कार्रवाई के बाद भी बेलवापानी या आसपास के क्षेत्रों में अवैध उत्खनन की एक भी शिकायत आई, तो वे चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने साफ कहा कि अगली बार बिना किसी चेतावनी के हजारों ग्रामीणों के साथ सीधे पुलिस थाने और जिला मुख्यालय का घेराव किया जाएगा, जो इस क्षेत्र का नया नियम (CG Sand Mining Protest) बन चुका है कि जनता के हक पर डाका बर्दाश्त नहीं होगा।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि रात 1 बजे की गई इस आधी-अधूरी कार्रवाई के बाद क्या माइनिंग विभाग के बड़े अफसरों और उन सफेदपोश नेताओं पर गाज गिरेगी जो इस अवैध रेत के धंधे को संरक्षण दे रहे हैं? क्या ज़ब्त की गई मशीनों के मालिकों पर कड़ी कानूनी एफ़आईआर दर्ज होगी या फिर सुबह होते ही उन्हें पिछले दरवाजे से छोड़ दिया जाएगा? बहरहाल, विधायक के इस औचक निरीक्षण और आक्रामक धरने ने यह तो साफ कर दिया है कि कांकेर में अब माफिया राज की मनमर्जी नहीं चलेगी। आने वाले दिन इस पूरे परिक्षेत्र की सियासत और प्रशासन की साख के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, जहां जनता का यह जनांदोलन और सजगता की गति (CG Sand Mining Protest) आने वाले समय में रेत माफिया के साम्राज्य को पूरी तरह उखाड़ फेंकेगी।




