सीजी भास्कर, 31 मई। जून महीने की शुरुआत के साथ ही टैक्स, बैंकिंग, यूपीआई और क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई बड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इन नए नियमों का असर नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ेगा। एडवांस टैक्स की समय सीमा से लेकर यूपीआई सुरक्षा और क्रेडिट कार्ड शुल्क तक कई बदलाव लागू होंगे। (Taxes will change from June)
एडवांस टैैक्स और पुरानी टैक्स व्यवस्था में बदलाव : Taxes will change from June
15 जून तक एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करना अनिवार्य होगा। जिन करदाताओं की अनुमानित टैक्स देनदारी 10 हजार रुपए से अधिक है, उन्हें कुल टैक्स का कम से कम 15 प्रतिशत भुगतान करना होगा। तय समय पर भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले कर्मचारियों को राहत दी गई है। हॉस्टल भत्ते पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 9 हजार रुपए प्रतिमाह कर दी गई है। बच्चों की शिक्षा भत्ता छूट भी बढ़ाई गई है। इसके अलावा बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों को 50 प्रतिशत एचआरए छूट वाली श्रेणी में शामिल किया गया है।
UPI और बैंकिंग सेवाओं में नए फीचर लागू
यूपीआई भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नया फीचर लागू किया गया है। अब किसी भी नंबर या क्यूआर कोड पर भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर संबंधित व्यक्ति का सत्यापित नाम दिखाई देगा। इससे ऑनलाइन ठगी की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
ईपीएफओ भी यूपीआई के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा शुरू करने की तैयारी में है, जिससे कर्मचारियों को जल्द भुगतान मिल सकेगा। दूसरी ओर कुछ बैंकों ने एसएमएस अलर्ट और लेनदेन नियमों में बदलाव किए हैं। अब कई मामलों में केवल बड़े ट्रांजैक्शन पर ही एसएमएस अलर्ट मिलेगा।
क्रेडिट कार्ड और शेयर बाजार नियम हुए सख्त : Taxes will change from June
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए खर्च बढ़ सकता है। कई बैंकों ने किराया, शिक्षा शुल्क, यूटिलिटी बिल और ईंधन भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क या रिवॉर्ड प्वाइंट्स की सीमा तय कर दी है। कुछ बैंकों ने ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की है।
शेयर बाजार में फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए सेबी का नया 50:50 मार्जिन नियम पूरी तरह लागू हो गया है। इसके तहत निवेशकों को कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन नकद या नकदी जैसे साधनों में रखना होगा। वहीं सरकारी सब्सिडी वाले सोलर प्रोजेक्ट्स में अब केवल अनुमोदित कंपनियों के सोलर मॉड्यूल का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है, जिससे शुरुआती लागत बढ़ सकती है।




