सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में मानव-हाथी द्वंद्व के बीच अब हाथियों (CG Elephant Death) के मासूम बच्चों (शावकों) पर एक बहुत बड़ा और जानलेवा संकट मंडराने लगा है। रायगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां खरसिया वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मांड नदी में एक और नन्हे हाथी शावक का तैरता हुआ शव बरामद किया गया है।
सोमवार की सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने नदी के पानी में 3 से 5 माह के इस बेजान शावक को देखा, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। आनन-फानन में इसकी सूचना वन विभाग की टीम को दी गई, जिसने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से शव को पानी से बाहर निकाला। शुरुआती जांच में मासूम शावक की मौत नदी के गहरे पानी में डूबने के कारण होने की आशंका जताई जा रही है। इस नई और हृदयविदारक घटना ने राज्य में वन्यजीव प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है और प्रदेश में (CG Elephant Death) का यह सिलसिला अब वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
52 हाथियों के दल के साथ आया था मासूम
इस दर्दनाक हादसे की पृष्ठभूमि को देखें, तो जानकारी के अनुसार रविवार की रात पड़ोसी छाल वन परिक्षेत्र की ओर से करीब 52 हाथियों का एक बहुत ही विशाल और आक्रामक दल जंगल के रास्ते होते हुए खरसिया वन परिक्षेत्र की सीमा में दाखिल हुआ था। वन अधिकारियों का अनुमान है कि भीषण गर्मी और प्यास से व्याकुल हाथियों का यह पूरा झुंड आधी रात को गुर्दा और देहजरी गांवों के बीच स्थित मांड नदी के संगम क्षेत्र में पानी पीने या नहाने के लिए उतरा होगा। नदी में जलक्रीड़ा करने और अपनी प्यास बुझाने के बाद हाथियों का यह पूरा दल रात में ही वापस छाल वन परिक्षेत्र की ओर लौट गया।
परंतु, इस पूरे आवागमन के दौरान अत्यधिक छोटा और कमजोर होने के कारण यह 3 से 5 माह का शावक अपने दल की तेज रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया और गहरे पानी में ही पीछे छूट गया। सोमवार सुबह जब ग्रामीण नदी की तरफ गए, तो उन्होंने शावक के शव को पानी में उतराता हुआ पाया। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। वन विभाग के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा की वैधानिक कार्रवाई की और डॉक्टरों की टीम से शव का पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, शावक की मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा अंतिम विसरा और पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। वन्यजीवों की सुरक्षा में हो रही यह चूक (CG Elephant Death) के आंकड़ों को लगातार डरावना बना रही है।
25 दिनों का खूनी आंकड़ा, 4 मासूमों ने तोड़ा दम
रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल के जंगलों में पिछले 25 दिनों का इतिहास हाथियों के कुनबे के लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं रहा है। इस बेहद संक्षिप्त अवधि के दौरान जिले के दोनों वन मंडलों में कुल 4 हाथी शावकों की अकाल मौत हो चुकी है। इन दर्दनाक मौतों में से 3 सबसे बड़ी घटनाएं धर्मजयगढ़ वन मंडल में और 1 घटना रायगढ़ वन मंडल क्षेत्र में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई हैं
08 मई 2026 (पहली घटना) : छाल रेंज के सिंघीझाप क्षेत्र में स्थित घोघरा डैम के गहरे पानी में डूबने के कारण करीब 6 माह के एक मासूम हाथी शावक की पहली मौत हुई थी।
11 मई 2026 (दूसरी घटना) : तरकेला गांव के केराझरिया जंगल में स्थित एक स्थानीय बांध के खतरनाक दलदल में फंसने से एक और नन्हे शावक ने तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा दी थी।
24 मई 2026 (तीसरी घटना) : आमागुड़ा-पुसल्दा क्षेत्र के एक गहरे ग्रामीण तालाब में सुबह-सुबह एक और हाथी शावक का तैरता हुआ शव मिलने से हड़कंप मच गया था, जहां हथिनी मां अपनी सूंड से बच्चे को उठाने का प्रयास करती रही थी।
01 जून 2026 (चौथी घटना) : अब खरसिया वन परिक्षेत्र के गुर्दा-देहजरी के पास मांड नदी के तेज बहाव और गहरे पानी में डूबने से इस चौथे शावक की मौत हो गई है।
लगातार हो रही इन सिलसिलेवार मौतों से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ का यह पूरा बेल्ट (CG Elephant Death) का एक बड़ा डेंजर जोन बनता जा रहा है।
डीएफओ बोले- पानी में डूबने की आशंका
इस संवेदनशील और गंभीर मामले पर रायगढ़ के डीएफओ (Divisional Forest Officer) अरविंद पीएम ने मीडिया को आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि खरसिया रेंज के तहत मांड नदी में एक हाथी शावक का शव मिलने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी शुरुआती जमीनी जांच और घटनास्थल के हालातों को देखकर यही प्रतीत होता है कि शावक की मौत नदी के गहरे पानी में डूबने और दल से बिछड़ जाने के कारण हुई है। सूचना मिलते ही वन विभाग का पूरा मैदानी अमला और वन्यजीव विशेषज्ञ तत्काल मौके पर पहुंच गए थे और कानूनन आवश्यक कार्रवाई तेजी से शुरू कर दी गई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वे हाथियों के इस 52 सदस्यीय दल की लगातार ट्रैकिंग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके। लेकिन, पर्यावरणविदों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग का निगरानी तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हो चुका है। यदि विभाग हाथियों के दल की सही ढंग से मॉनिटरिंग करता, तो दलदल और नदियों में डूब रहे इन मासूम बच्चों को समय रहते बचाया जा सकता था। बहरहाल, 25 दिनों में 4 शावकों की मौत ने राज्य सरकार और वन मुख्यालय को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है, और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों का यह पूरा वंश ही गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।




