सीजी भास्कर, 3 जून। हाईकोर्ट ने जिंदल स्टील लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए 153.55 करोड़ रुपये की रिकवरी से जुड़े नोटिस पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि किसी भी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना उस पर वित्तीय दायित्व नहीं थोपा जा सकता। कोर्ट ने मामले में पूर्व में पारित आदेश को निरस्त करते हुए नियामक आयोग को नए सिरे से सुनवाई कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। (Jindal Steel gets relief from High Court)
वसूली नोटिस और विवाद की पृष्ठभूमि : Jindal Steel gets relief from High Court
मामला वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 के दौरान बिजली आपूर्ति से जुड़ा है। उस समय निर्धारित दरों पर भुगतान किया गया था, लेकिन बाद में टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया के दौरान बिजली की श्रेणी में बदलाव करते हुए दरों को संशोधित किया गया। इसके आधार पर वितरण कंपनी ने जिंदल स्टील को 153.55 करोड़ रुपये लौटाने का नोटिस जारी किया था और कंपनी की ओपन एक्सेस एनओसी भी रोक दी गई थी।
सुनवाई का अवसर नहीं मिलने पर उठे सवाल
कंपनी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि टैरिफ निर्धारण और उससे संबंधित अपीलीय प्रक्रिया में उसे पक्षकार नहीं बनाया गया। बिना व्यक्तिगत सुनवाई के इतनी बड़ी वित्तीय देनदारी तय करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। वहीं, संबंधित पक्षों ने तर्क दिया कि टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में सार्वजनिक सूचना जारी करना पर्याप्त माना जाता है।
हाईकोर्ट ने दिए नए सिरे से सुनवाई के निर्देश : Jindal Steel gets relief from High Court
डिवीजन बेंच ने कहा कि जब किसी निर्णय का सीधा वित्तीय प्रभाव किसी विशेष संस्था पर पड़ता है, तब व्यक्तिगत सुनवाई आवश्यक हो जाती है। अदालत ने रिकवरी नोटिस और ओपन एक्सेस रोकने से जुड़े आदेशों को निरस्त करते हुए नियामक आयोग को दो महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर नया निर्णय लेने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नए निर्णय तक कंपनी के खिलाफ कोई वसूली या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।




