सीजी भास्कर, 05 जून : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित Liquor Scam और DMF Scam मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। जांच एजेंसियों ने कारोबारी अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 1400 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच का दायरा भी लगातार बढ़ाया जा रहा है।
ईडी की जांच के अनुसार कांग्रेस शासनकाल के दौरान सक्रिय रहे कथित सिंडिकेट ने शराब, डीएमएफ, नकली होलोग्राम और कस्टम मिलिंग (Chhattisgarh Liquor Scam) सहित विभिन्न मामलों में हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। एजेंसी का दावा है कि इन मामलों के जरिए लगभग 4000 करोड़ रुपये के आर्थिक घोटालों का नेटवर्क संचालित किया गया।
शराब घोटाला सबसे बड़ा मामला
जांच एजेंसियों के मुताबिक सबसे बड़ा मामला शराब घोटाले का है। ईडी का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से अवैध रूप से कच्ची शराब की बिक्री कर 3200 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई। इस मामले में अब तक 85 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है और कई आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के प्रकरण दर्ज हैं।
ढेबर और टुटेजा पर शिकंजा
जांच एजेंसियों का कहना है कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल रहे हैं। डीएमएफ घोटाले में जिला खनिज न्यास निधि के कार्यों में कथित अनियमितताओं, पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कई परियोजनाओं में 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने के आरोप हैं।
नकली होलोग्राम और प्लेसमेंट घोटाले में भी खुलासे
ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच (Chhattisgarh Liquor Scam) में नकली होलोग्राम घोटाले से जुड़े कई दस्तावेज सामने आए हैं। आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां की गईं। वहीं प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से लगभग 183 करोड़ रुपये के ओवरटाइम भुगतान में भी वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है। कस्टम मिलिंग प्रकरण में भी करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच की जा रही है।
1400 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त
जांच एजेंसियों ने जून 2026 तक की कार्रवाई में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी, व्यावसायिक और अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। इसके अलावा गोवा स्थित लगभग 110 करोड़ रुपये मूल्य के लग्जरी वेस्टिन होटल को भी जब्त किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस होटल की खरीद में कथित घोटाले की रकम का उपयोग किया गया था।
रायपुर में ढेबर सिटी के प्लॉट, होटल, बेनामी जमीनें, शेल कंपनियों से जुड़ी संपत्तियां और होटल वेनिंगटन कोर्ट सहित 116 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियां भी जब्त की गई हैं। वहीं अनिल टुटेजा और उनके परिजनों के नाम दर्ज लगभग 15.82 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां भी कुर्क की जा चुकी हैं।
बैंक खाते, निवेश और आभूषण भी जब्त
जांच एजेंसियों ने बैंक खातों, शेयरों, म्यूचुअल फंड निवेश, नकदी, फिक्स्ड डिपॉजिट और लगभग 28 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण भी जब्त किए हैं। एजेंसियां इन संपत्तियों के स्रोत और लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई तेज
ईडी ने दोनों प्रमुख आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है। कई जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। अब विशेष अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की सुनवाई तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इस कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ के इन चर्चित घोटालों में लगातार सामने आ रही नई जानकारियों और कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।




