सीजी भास्कर, 04 जून : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC Scam) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। बुधवार को रायपुर और भिलाई समेत नौ ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान ईडी को महत्वपूर्ण दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी भी मिली है। सूत्रों के अनुसार पीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के करीबी माने जाने वाले उत्कर्ष चंद्राकर के ठिकाने से 8 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद भर्ती घोटाले की जांच नए मोड़ पर पहुंच गई है।
ईडी की अलग-अलग टीमों ने सुबह से लेकर देर रात तक छापेमारी की कार्रवाई जारी रखी। करीब 9:30 बजे तक चली इस जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लिए गए। अधिकारियों का मानना है कि इन साक्ष्यों से भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और प्रभावशाली लोगों की भूमिका से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
नौ ठिकानों पर एक साथ हुई कार्रवाई
ईडी (CGPSC Scam) की कार्रवाई रायपुर और भिलाई के उन ठिकानों पर केंद्रित रही, जो कथित तौर पर सीजीपीएससी भर्ती घोटाले से जुड़े हुए हैं। जांच के दायरे में पीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व आईएएस अमृत खलखो, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक तथा सहायक परीक्षा नियंत्रक गनवीर सहित कई पूर्व अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय एजेंसी पिछले कई महीनों से जुटाए गए इनपुट और दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई कर रही थी। इसी वजह से छापेमारी के दौरान जांच टीमों को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य आसानी से प्राप्त हुए।
2019 से 2022 तक की सभी परीक्षाएं जांच के दायरे में
मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2019 से 2022 तक आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच की जाएगी। एजेंसी अब मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार, कथित भाई-भतीजावाद और चयन प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं के पहलुओं की पड़ताल कर रही है। इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें भी जांच पर टिक गई हैं, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
फोरेंसिक जांच से खुल सकते हैं बड़े राज
छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कंप्यूटर, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल डेटा से भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की पूरी कड़ी सामने आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद कई बड़े नामों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। इसके आधार पर आने वाले समय में नए खुलासे और संभावित गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की भी होगी पड़ताल
ईडी (CGPSC Scam) अब जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच करेगी। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान किसी प्रकार के आर्थिक लाभ, लेनदेन या प्रभाव का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। सीजीपीएससी भर्ती घोटाले की जांच अब ऐसे चरण में पहुंच चुकी है, जहां हर नए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य से कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।




