सीजी भास्कर, 05 जून : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी (CG Paddy Scam) व्यवस्था से जुड़े एक अहम मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लाखों रुपये की धान की कमी को केवल चूहों, कीटों और प्राकृतिक सूखेपन के हवाले कर जांच से बचा नहीं जा सकता। दुर्ग जिले की कुम्हाली सेवा सहकारी समिति में 23 लाख रुपये से अधिक मूल्य की धान और बारदानों की कमी के मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कहा कि यह जांच का विषय है कि धान की कमी वास्तव में प्राकृतिक कारणों से हुई या फिर यह लापरवाही अथवा गबन का मामला है। ऐसे मामलों में प्रारंभिक स्तर पर आपराधिक जांच को रोका नहीं जा सकता।
CG Paddy Scam क्या है पूरा मामला
खाद्य एवं सहकारिता विभाग द्वारा 23 अप्रैल 2026 को किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान कुम्हाली सेवा सहकारी समिति में 690.70 क्विंटल धान और 3,057 बारदानों (CG Paddy Scam) की कमी पाई गई थी। विभागीय आकलन के अनुसार इसकी कुल कीमत लगभग 23.54 लाख रुपये है। मामले में समिति प्रबंधक अतुल कुमार वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद प्रबंधक ने एफआईआर निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका में क्या-क्या तर्क दिए गए
याचिकाकर्ता ने अदालत में दावा किया कि धान (CG Paddy Scam) की कमी किसी आपराधिक कृत्य का परिणाम नहीं है, बल्कि कई प्राकृतिक और तकनीकी कारणों से ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक धान का उठाव नहीं होने से गोदामों में कीटों का प्रकोप बढ़ गया। चूहों द्वारा धान को नुकसान पहुंचाया गया। मौसम और जलवायु के प्रभाव से धान में अत्यधिक नमी कम होने के कारण वजन घट गया। सरकारी बारदानों की गुणवत्ता खराब होने से अनाज का लगातार रिसाव होता रहा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सभी तर्क जांच के दौरान परखे जाने वाले तथ्य हैं। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है और ऐसे में एफआईआर को रद्द करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि केवल यह कह देना कि धान की कमी प्राकृतिक कारणों से हुई, आपराधिक जांच को रोकने का आधार नहीं बन सकता। यह जांच एजेंसियों का काम है कि वे वास्तविक कारणों का पता लगाएं।
अग्रिम जमानत का रास्ता खुला
हालांकि हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यह स्पष्ट किया कि वह कानून के तहत अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र है। 23 लाख रुपये से अधिक की धान कमी के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि चूहों, कीटों और प्राकृतिक सूखेपन की दलीलों की सत्यता जांच के बाद ही तय होगी। प्रारंभिक स्तर पर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि सहकारी समितियों में धान खरीदी से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। धान और बारदानों की कमी के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच के बाद होगा।




