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Home » कांग्रेस सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट “गोठान” बना मवेशियों की कब्रगाह, बंद मवेशियों की भूख-प्यास से मौत, कोसा नाला और गोढ़ी में कंकाल नोच रहे थे कुत्ते, फसल बचाने सरपंच ने बंद करवाए थे 40 मवेशी

कांग्रेस सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट “गोठान” बना मवेशियों की कब्रगाह, बंद मवेशियों की भूख-प्यास से मौत, कोसा नाला और गोढ़ी में कंकाल नोच रहे थे कुत्ते, फसल बचाने सरपंच ने बंद करवाए थे 40 मवेशी

By Newsdesk Admin
05/12/2024
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सीजी भास्कर, 05 दिसंबर। छत्तीसगढ़ में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की गोठान योजना अब बदहाल हो चुकी है। मवेशियों की देखभाल करने के लिए पिछली सरकार ने प्रदेश के 10 हजार स्थानों पर गोठान बनाए थे जिनका जिम्मा उस इलाके के लोगों को ही एक समिति बनाकर दिया गया था। गोठान योजना पर कांग्रेस सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन अब गोठान बदहाल हो चुके हैं। गोठान में गायों की तथाकथित देखभाल तो हो रही है साथ ही अब गोठान मवेशियों की कब्रगाह भी बन गए हैं मगर समितियां दावा कर रही हैं कि सब कुछ ठीक है।

आपको बता दें कि दुर्ग जिले के गोढी गांव में 3 मंगलवार की सुबह 10 बजे गोठान में बहुत सी गौ माता की भूख प्यास से मृत्यु होने का मामला सामने आया। घटना की सूचना मिलते ही गौ सेवक प्रीतम साहू, नरेश चन्द्रवंशी, कुमार साहू, संस्कार गोस्वामी, भानु पाण्डेय और अन्य गौ सेवकों ने गोठान पहुंचकर देखा तो गौवंशों का अंग सभी तरफ फैला हुआ है और कुछ गौवंशो को गोठान के बाहर फेंक दिया गया। जिसके बाद उन्होंने सरपंच से बात की तो उन्होंने कहा कि इस बात की सूचना मुझे दो दिन पहले मिली थी, मैंने आकर देखा भी था।

आरोप है कि सरपंच ने पीड़ित गौवंशों का इलाज नहीं कराया और खाने के लिये चारा पानी की व्यवस्था नहीं, जिससे सभी गौवंशों की मौत हो गई। गौ सेवकों ने नंदिनी थाना पहुंचकर आवेदन दिया कि इसका दोषी जो भी हो उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर उसे जेल भेजें और ऐसा कृत्य दोबारा न हो इसलिए दोषी को सजा मिलनी चाहिए।

भिलाई में सुपेला के कोसानाला और राजनांदगांव बायपास में डी-मार्ट के सामने बनाए गए गोठानों में भी सप्ताह के भीतर 10 मवेशियों की मौत की खबर मिली है। इन मवेशियों की मौत भूख और प्यास से बताई जा रही है। पैरा, चारा-कुट्टी की व्यवस्था नहीं होने से कई मवेशी बीमार भी हैं।

आपको बता दें कि कांग्रेस शासन में ड्रीम प्रोजेक्ट रहे गोठान सरकार बदलने के बाद बदहाल हो चुके हैं। गोठान में न चारा है और न ही पानी। गोठान अब खाली ही दिखाई देते हैं। कुछ कुछ गोठानों में आवारा मवेशियों को रखा गया है तो उनके लिए भोजन की व्यवस्था नहीं है। कोसानाला और बायपास के गोठान में मवेशियों की मरने की वजह भी भूख और बीमारी है। यहां 10 गायों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय को सूचना भेजी लेकिन कोई भी नहीं आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोठान सिर्फ नाम मात्र का रह गया है, कमाई होते तक काम चला अब बंद है।

कोसानाला गोठान समिति की पूर्व अध्यक्ष रेखा बघेल ने बताया कि गोठान में गायों की मौत हुई है। अब हमारी जिम्मेदारी खत्म हो गई है। नए ठेकेदार ने काम संभाला है, अब वही इसे देख रहे हैं। गायों की मौत झिल्ली (प्लास्टिक की थैली) खाने से हुई है, ऐसा बताया जा रहा है।

कोसा नाला सुपेला गोठान के नए प्रबंधक सोमू साहू ने बताया कि हमने तीन दिन पहले काम संभाला है। जल्द ही सब कुछ ठीक कर लेंगे। ऐसा लगता है कि जिन गायों की मौत हुई है, उन्होंने बहुत ज्यादा झिल्ली का सेवन किया है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही गायों की मौत की सही वजह पता चलेगी। उनका दावा है कि गायों को चारा-पानी दिया जा रहा है।

दूसरी तरफ दुर्ग जिले के नंदिनी थाना क्षेत्र में अहिवारा के गोढ़ी गांव गोठान में भूख-प्यास से 13 से अधिक गायों की मौत हुई है। कुछ तो कंकाल में तब्दील हो गईं। मृत गाय के शव को कुत्ते नोचते भी दिखे हैं। बताया जा रहा है कि सरपंच ने फसल बचाने के लिए 15 दिन पहले करीब 40 आवारा मवेशियों को गोठान में बंद कर दिया था। आरोप है कि उन्हें चारा पानी नहीं दिया गया। घटना की जानकारी लगने के बाद गो-सेवकों ने हंगामा किया। FIR दर्ज कर सरपंच पर एक्शन लेने की मांग की। जनपद सीईओ ने मवेशियों का पीएम कराया है। उन्होंने आशंका जताई है कि मवेशियों की निमोनिया से मौत हुई है। बताया जा रहा है कि गो शालाओं में एक गाय के पीछे 35 रुपए वर्तमान में चारा पानी के लिए खर्च दिया जा रहा है।

गोढ़ी के डोमर सिंह पाल ने मवेशियों की मौत के लिए सरपंच गोपी साहू को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि सरपंच ने किसानों की फसल चरने से बचाने के लिए एक समिति बनाई थी। उस समिति में उन्होंने अपने लोगों को शामिल किया था।‌

सरपंच ने किसानों से वादा किया था कि समिति सभी की मदद लेगी और आवारा मवेशियों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करेगी। जिसके बाद करीब 40 आवारा मवेशियों को गौठान में बंद कर दिया गया लेकिन पिछले 15 दिनों तक सरपंच और उसकी कमेटी ने मवेशियों का कोई ध्यान नहीं रखा। आरोप है कि चारा और पानी तक नहीं दिया गया, जिस कारण 13 से अधिक गोवंशों की गौठान के अंदर भूख-प्यास से जान चली गई। जब गांव के लोगों को गौठान में सड़ रहे मवेशियों की बदबू आने लगी, तब इसका खुलासा हुआ। मामले को दबाने के लिए सरपंच ने आनन-फानन में मवेशियों के शव और उनके कंकालों को ट्रैक्टर में भरकर दूसरी जगह फेंकवा दिया। इसी बीच पशु विभाग की टीम वहां पहुंच गई। उन्होंने कुछ मवेशियों को अपने कब्जे में लेकर उनका पोस्टमॉर्टम कराया है।

धमधा जनपद पंचायत सीईओ किरण कौशिक ने बताया कि मवेशियों के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। आशंका है कि, निमोनिया बीमारी होने से गायों की मौत हुई है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण पता चल पाएगा कि, उनकी मौत कैसे हुई। सीईओ किरण कौशिक ने कहा कि उन्हें किसी भी तरह की कमेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं है, अगर सरपंच ने कमेटी बनाई थी तो चारा-पानी की व्यवस्था करनी थी। ऐसे में सभी गोवंश की मौत के लिए कमेटी और सरपंच जिम्मेदार माने जाएंगे। दूसरी तरफ सरपंच ने इसके लिए पूरे गांव को जिम्मेदार बताया है।

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