सीजी भास्कर, 10 जून। दुर्ग जिले के चर्चित संतोष साहू हत्याकांड में लगभग तीन साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है। संतोष की पत्नी उमा बाई साहू और उसके भतीजे लॉकेश्वर उर्फ लक्की साहू को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में दोषी ठहराया गया है। (Santosh Sahu Murder Case Verdict)
पंचम अपर सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार कोशले की अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले में अतिरिक्त लोक अभियोजक नंदिनी चंद्रवंशी ने पैरवी की।
आरोपी महिला का आरोप था कि उसका पति घर खर्च के लिए पर्याप्त पैसे नहीं देता था। इसी कारण घर में हमेशा तनाव और झगड़े का माहौल बना रहता था। इसी से परेशान होकर महिला ने अपने भतीजे के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी।
यह घटना 28 मई 2023 की सुबह की है, जब परिवार को संतोष कुमार साहू की अचानक मौत की सूचना मिली। परिजनों को बताया गया कि उनकी मौत सीने में दर्द के कारण हुई है।
हालांकि, जब रिश्तेदार घर पहुंचे, तो उन्हें संतोष के गले पर निशान दिखाई दिए। कमरे का माहौल भी सामान्य नहीं लग रहा था, जिससे परिजनों को मौत पर संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से टूटी हुई चूड़ियों के टुकड़े मिले। मृतक के गले पर दबाव के निशान स्पष्ट थे, और पत्नी उमा बाई के चेहरे पर भी खरोंचें थीं। ये सुराग पुलिस को बता रहे थे कि मौत स्वाभाविक नहीं थी।
पोस्टमार्टम में पता चला कि गला दबाया गया था। इससे शक और गहरा हो गया और पुलिस ने घर में मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू कर दी।
अभियोजन के अनुसार, संतोष साहू और उसकी पत्नी उमा बाई के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। संतोष को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था, जिस वजह से दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।
वहीं, उमा बाई का आरोप था कि उसका पति घर खर्च के लिए पर्याप्त पैसे नहीं देता था। इसी कारण घर में हमेशा तनाव और झगड़े का माहौल बना रहता था। अदालत में पेश सबूतों के आधार पर माना गया कि यही पारिवारिक विवाद आगे चलकर हत्या की साजिश का कारण बना।
इस तरह बनाई हत्या की साजिश : Santosh Sahu Murder Case Verdict
जांच में सामने आया कि घटना से एक दिन पहले उमा बाई ने अपने भतीजे लॉकेश्वर उर्फ लक्की को फोन कर बुलाया था। अभियोजन का दावा था कि इसी दौरान संतोष साहू को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।
रात में संतोष को शराब पिलाई गई। जब वह गहरी नींद में चला गया तब बुआ और भतीजे ने मिलकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
अदालत के समक्ष पेश सबूतों के अनुसार हाथों, चादर और तकिए की मदद से उसका गला दबाया गया ताकि वारदात को प्राकृतिक मौत जैसा दिखाया जा सके।
हत्या के बाद रची गई बचाव की कहानी
हत्या के बाद आरोपियों ने यह दिखाने की कोशिश की कि मौत बीमारी या सीने में दर्द की वजह से हुई है। लेकिन घटनास्थल से मिले सबूत, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों ने उनके दावे को गलत साबित कर दिया।
जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में लिए। उनके कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की गई। साथ ही, घटनास्थल से मिली चादर, तकिया और दूसरी वस्तुओं को भी सबूत के तौर पर जांच में शामिल किया गया।
कोर्ट ने क्यों माना आरोपियों को दोषी?: Santosh Sahu Murder Case Verdict
बचाव पक्ष का कहना था कि हत्या को अपनी आंखों से देखने वाला कोई गवाह नहीं है और पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है।
लेकिन अदालत ने कहा कि यदि परिस्थितिजन्य सबूत एक-दूसरे से जुड़कर पूरी घटना की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं और किसी अन्य संभावना की गुंजाइश नहीं छोड़ते, तो उन्हें पर्याप्त माना जा सकता है।
अदालत ने पाया कि हत्या का कारण, घटना से पहले की परिस्थितियां, आरोपियों की भूमिका, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य बरामद सबूत आपस में जुड़े हुए हैं। इन सबूतों ने मिलकर आरोपियों के खिलाफ एक मजबूत मामला तैयार किया।
तीन साल की सुनवाई के बाद उम्रकैद
करीब तीन साल तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 120-बी के तहत दोषी करार दिया।
उम्रकैद की सजा, साथ-साथ चलेंगी सजाएं : Santosh Sahu Murder Case Verdict
न्यायालय ने दोनों दोषियों को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 500 रुपए अर्थदंड और आपराधिक षड्यंत्र के अपराध में आजीवन कारावास और 200 रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं चुकाने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।



