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Paddy Procurement : खरीदी तो पूरी हो गई, फिर भी केंद्रों में क्यों अटका पड़ा है हजारों टन धान

By Newsdesk Admin
10/06/2026
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सीजी भास्कर, 10 जून। बस्तर संभाग के कई धान खरीदी केंद्रों में इन दिनों एक ही चर्चा सुनाई (Paddy Procurement) दे रही है। खरीदी का काम खत्म हुए महीनों गुजर चुके हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में धान अब भी केंद्रों में जमा है। मानसून की शुरुआत के साथ कर्मचारियों और किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खुले में रखा धान बारिश की चपेट में आ सकता है।

Contents
  • बारिश के बीच बढ़ी धान की सुरक्षा की चिंता : Paddy Procurement
  • बस्तर जिले के कई केंद्रों में अब भी पड़ा है धान
  • अधिकांश जिलों में उठाव की रफ्तार धीमी
  • 382 केंद्रों में अब भी पड़ा है हजारों टन धान
  • मानसून में प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
  • करोड़ों की उपज अब भी इंतजार में

कई जगहों पर धान की बोरियां तिरपाल के सहारे सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि लगातार बदलते मौसम ने जिम्मेदार विभागों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते उठाव नहीं हुआ तो नुकसान की आशंका और बढ़ सकती है।

बारिश के बीच बढ़ी धान की सुरक्षा की चिंता : Paddy Procurement

संभाग के अलग अलग जिलों में किसानों से खरीदा गया धान अब तक पूरी तरह भंडारण केंद्रों तक नहीं पहुंच पाया है। बारिश शुरू होने के बाद कुछ स्थानों से धान के भीगने और गुणवत्ता प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। खुले में रखे भंडार को चूहों और अन्य कारणों से नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना हुआ है।

केंद्रों से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि उठाव में देरी होने से उन्हें अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ रहा है और धान की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौती बन गया है।

बस्तर जिले के कई केंद्रों में अब भी पड़ा है धान

बस्तर जिले के 79 खरीदी केंद्रों में इस सीजन 2 लाख 81 हजार 742 मैट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया था। इसके बावजूद खरीदी समाप्त होने के कई महीने बाद भी 7 हजार 750 मैट्रिक टन से ज्यादा धान केंद्रों में रखा हुआ है।

स्थिति इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है क्योंकि सामान्य तौर पर खरीदी के बाद परिवहन और भंडारण की प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो जानी चाहिए थी।

अधिकांश जिलों में उठाव की रफ्तार धीमी

धान परिवहन की समस्या केवल एक जिले तक सीमित (Paddy Procurement) नहीं है। दंतेवाड़ा को छोड़कर संभाग के अधिकांश जिलों में खरीदी केंद्रों पर धान का उठाव लंबित है। गोदामों तक परिवहन की धीमी गति के कारण कई केंद्रों में जगह की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है।

अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह चिंता भी बनी हुई है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आगामी खरीदी सीजन की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

382 केंद्रों में अब भी पड़ा है हजारों टन धान

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बस्तर संभाग के 382 धान खरीदी केंद्रों में इस वर्ष 13 लाख 74 हजार 383 मैट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इसके बाद भी 40 हजार 178 मैट्रिक टन धान का परिवहन नहीं हो पाया है। इसका मतलब यह है कि खरीदी गई उपज का बड़ा हिस्सा अभी भी केंद्रों में पड़ा हुआ है और गोदामों तक पहुंचने का इंतजार कर रहा है।

मानसून में प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

मानसून सक्रिय होने के साथ प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। यदि शेष धान का जल्द उठाव नहीं किया गया तो लगातार बारिश से उसकी गुणवत्ता प्रभावित (Paddy Procurement) हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंचने के साथ साथ पूरी खरीदी व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

करोड़ों की उपज अब भी इंतजार में

सबसे बड़ा सवाल यह है कि खरीदी प्रक्रिया समाप्त हुए करीब चार महीने गुजर जाने के बाद भी करोड़ों रुपये मूल्य का धान केंद्रों में क्यों पड़ा हुआ है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन शेष धान के परिवहन की प्रक्रिया को कितनी तेजी से पूरा करते हैं।

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