सीजी भास्कर, 12 जून : बलौदाबाजार जिले में किसानों की आय बढ़ाने और खाद-बीज की उपलब्धता को मजबूत करने के लिए बीज उत्पादन कार्यक्रम (Seed Production Program) की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाएगी। जिला प्रशासन की इस पहल से किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
बीज उत्पादन प्रक्रिया (Seed Production Program) की शुरुआत जल्द
जिले में बीज उत्पादन की कार्यवाही कलेक्टर श कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जल्द शुरू की जाएगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड छेरकापुर और कृषि विभाग के समन्वय से किसानों का पंजीयन कराया जाएगा। किसानों को पंजीयन के लिए आधार कार्ड की छायाप्रति, बैंक पासबुक की छायाप्रति और बी-1 दस्तावेज के साथ निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।
पंजीयन शुल्क और आय का अवसर
बीज उत्पादन कार्यक्रम के लिए पंजीयन शुल्क 930 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। वहीं, बीज परीक्षण में मानक प्राप्त होने पर किसानों को 3850 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा, जो सामान्य दर से 750 रुपये अधिक है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा।
लक्ष्य और पिछले वर्ष का प्रदर्शन
उप संचालक कृषि दीपक नायक ने बताया कि खरीफ वर्ष 2026 में जिले में 1250 हेक्टेयर में बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, वर्ष 2025 में 416 किसानों द्वारा 746.350 हेक्टेयर में बीज उत्पादन किया गया था। वर्ष 2027 की मांग को ध्यान में रखते हुए अधिक किसानों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
बीज उपलब्धता की स्थिति
जिले में खरीफ 2026 के लिए कुल 32994 क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 19951.40 क्विंटल बीज का भंडारण किया जा चुका है। अब तक 15073.50 क्विंटल बीज किसानों को वितरित भी किया जा चुका है।
कौन-कौन सी फसलें शामिल
इस कार्यक्रम के तहत धान, कोदो-कुटकी, अरहर, उड़द, मूंग, तिल, सोयाबीन, सनई, ढेंचा सहित प्रमुख खरीफ फसलों के आधार एवं प्रमाणित बीजों का वितरण किया जा रहा है। ये बीज सहकारी समितियों, कृषि विभाग के कार्यालयों और छेरकापुर (पलारी) स्थित बीज प्रक्रिया केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
किसानों के लिए बड़ा अवसर
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम किसानों को न केवल गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय का मजबूत साधन भी प्रदान करेगा। इससे कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और उत्पादन क्षमता दोनों में सुधार होने की उम्मीद है।



