सीजी भास्कर, 12 जून : महाराष्ट्र सीमा से लगे मोहला-मानपुर जिले के दक्कोटोला गांव (Road Construction By Villagers) में विकास के दावों की हकीकत सामने आई है। यहां ग्रामीण पिछले दो दशकों से पक्की सड़क (Rural Road Connectivity) की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर अब उन्होंने खुद ही सड़क निर्माण की जिम्मेदारी उठा ली है। ग्रामीण चंदा जुटाकर और श्रमदान कर कच्चे-पथरीले रास्ते को आवागमन योग्य बनाने में जुटे हैं। गांव के लोग इसे अपने दम पर विकास की लड़ाई बता रहे हैं।
शासन नहीं बना सका सड़क, ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
दक्कोटोला गांव के ग्रामीण हर घर से 500 रुपये चंदा एकत्र कर सड़क सुधार कार्य कर रहे हैं। सुबह और शाम दो पालियों में महिला-पुरुष श्रमदान कर सड़क पर मुरूम और अन्य सामग्री डाल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आवेदन देने के बावजूद पक्की सड़क नहीं बनी, इसलिए अब वे खुद रास्ता तैयार कर रहे हैं।
दो शिफ्ट में चल रहा श्रमदान अभियान
अंबागढ़ चौकी विकासखंड के ग्राम दक्कोटोला में रोजाना सुबह और शाम ग्रामीण सड़क निर्माण कार्य में जुट रहे हैं। गांव के महिला और पुरुष हाथों में फावड़ा, कुदाल और अन्य उपकरण लेकर चिल्हाटी मुख्य मार्ग तथा ग्राम खुर्सीटीकुल को जोड़ने वाले कच्चे और पथरीले रास्ते पर काम कर रहे हैं। ग्रामीण सड़क पर मुरूम डालकर और गड्ढों को भरकर उसे आवागमन योग्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
हर घर से 500 रुपये का सहयोग
सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए ग्रामीणों ने आपसी सहमति से प्रत्येक परिवार से 500-500 रुपये का सहयोग लिया है। इसी राशि से आवश्यक निर्माण सामग्री खरीदी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले इसी तरह सामूहिक प्रयास से सड़क को दुरुस्त करना पड़ता है, क्योंकि सरकारी स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
दो दशक से कर रहे मांग
ग्रामीणों के अनुसार पक्की सड़क निर्माण के लिए वे पिछले 20 वर्षों से शासन और प्रशासन के समक्ष लिखित तथा मौखिक रूप से मांग करते आ रहे हैं। इसके बावजूद गांव को आज तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिल सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
राशन लेने के लिए तय करनी पड़ती है लंबी दूरी
दक्कोटोला गांव के लोगों को ग्राम पंचायत खुर्सीटीकुल तक राशन लेने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। खराब सड़क के कारण आवागमन में भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़क पूरी तरह दलदल में बदल जाती है, जिससे गांव का संपर्क लगभग कट जाता है।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की बदहाल स्थिति का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ता है। बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि आवाजाही तक जोखिम भरी हो जाती है। ऐसे में ग्रामीण अब उम्मीद छोड़कर खुद ही सड़क सुधार में जुट गए हैं।





