सीजी भास्कर, 26 जुलाई : मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 1160 करोड़ रुपये के फोर्टिफाइड चावल घोटाले (Fortified Rice Scam) की जांच अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों को मिले सुरागों के आधार पर खुलासा हुआ है कि छिंदवाड़ा स्थित एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए आवंटित सरकारी चावल राजनांदगांव की गुरुदेव राइस मिल तक पहुंचा था। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल में जुट गई हैं।
यह भी पढ़ें : Eucalyptus Plantation : 51 लाख यूकेलिप्टस पौधों की तैयारी, 4 करोड़ के टेंडर पर बवाल!
राजनांदगांव की राइस मिल तक पहुंची जांच
जांच के दौरान सामने आया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी चावल निर्धारित स्थान तक पहुंचने के बजाय अन्य स्थानों पर भेजा गया। जांच एजेंसियां अब राजनांदगांव स्थित गुरुदेव राइस मिल की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क में कई राज्यों के कारोबारी और परिवहन तंत्र जुड़े हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें : ED-IT Raid : पीतल कारोबारी के ठिकानों पर ईडी-आईटी की संयुक्त रेड
पूर्व मंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनी भी जांच के दायरे में
मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा के बालाघाट जिलाध्यक्ष रामकिशोर कांवरे के परिवार से जुड़ी हर्ष इंडस्ट्रीज भी जांच के घेरे में आ गई है। पुलिस ने मिल के पार्टनर विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया है। वहीं रामकिशोर कांवरे के भाई कुमार और भतीजे अविनाश से भी कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है। जांच टीम ने फैक्ट्री से डीवीआर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
यह भी पढ़ें : Double Money Scam : 500 करोड़ की डबल मनी ठगी का बड़ा खुलासा, नेताओं-अधिकारियों समेत हजारों निवेशक जाल में फंसे
सीसीटीवी और रजिस्टर बने अहम साक्ष्य
पुलिस सूत्रों के अनुसार डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए वेयरहाउस से भेजा गया सरकारी चावल हर्ष इंडस्ट्रीज तक पहुंचा था। सीसीटीवी फुटेज और रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियां जांच का महत्वपूर्ण आधार बनी हैं। अधिकारियों का मानना है कि हर्ष इंडस्ट्रीज इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख केंद्र रही है।
तीन ट्रकों की जांच से खुला था घोटाला
इस घोटाले का खुलासा 2 जून को तब हुआ था, जब बालाघाट के नवेगांव वेयरहाउस से एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना किए गए तीन ट्रकों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि एक ट्रक निर्धारित प्लांट तक पहुंचने के बजाय एक राइस मिल में मिला, जबकि अन्य ट्रकों की आवाजाही भी संदेहास्पद पाई गई। इसके बाद गठित एसआईटी ने मामले की जांच शुरू की।
यह भी पढ़ें : Jail Wedding : सेंट्रल जेल बना शादी का मंडप, रेप के आरोपी संग युवती ने लिए सात फेरे
18 आरोपी, 12 गिरफ्तार (Fortified Rice Scam)
अब तक इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है, जिनमें 12 की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के साथ भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के दिल्ली मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय की टीमें भी समानांतर जांच कर रही हैं।
जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी चावल किन-किन राइस मिलों तक पहुंचा और इसे अवैध तरीके से बेचने का नेटवर्क कैसे संचालित किया गया।
यह भी पढ़ें : Education Minister Resignation : भूपेश का हमला, बोले- लड़ाई अभी बाकी
खाद्य मंत्री ने राज्य सरकार की भूमिका से किया इनकार
मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि एफसीआई और एथेनॉल प्लांट केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, इसलिए इस मामले में राज्य सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। वहीं जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क से जुड़े वित्तीय और लॉजिस्टिक पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं।
यह भी पढ़ें : Jail Wedding : सेंट्रल जेल बना शादी का मंडप, रेप के आरोपी संग युवती ने लिए सात फेरे



