सीजी भास्कर, 16 जून : राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ को वर्ष 1979 से 2001 के बीच 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों की अंकसूची में त्रुटि सुधार के लिए मध्य प्रदेश पर निर्भर रहना पड़ रहा है (Marksheet Correction Crisis)। कोरी स्टेशनरी (ब्लैंक मार्कशीट) उपलब्ध नहीं होने के कारण 351 छात्रों की संशोधित अंकसूली पिछले छह महीनों से जारी नहीं हो सकी है।
छात्रों के नाम, पिता के नाम और अन्य त्रुटियों में रिकॉर्ड स्तर पर सुधार किए जा चुके हैं, लेकिन नई अंकसूली प्रिंट नहीं होने से सैकड़ों छात्र नौकरी, दस्तावेज सत्यापन और उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
कोरी स्टेशनरी और एनओसी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कई बार मध्य प्रदेश बोर्ड को कोरी स्टेशनरी उपलब्ध कराने और स्वयं स्टेशनरी छापने की अनुमति देने के लिए पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
मामले के समाधान के लिए एक अधिकारी को भोपाल भी भेजा गया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। बताया जा रहा है कि सबसे अधिक मांग वर्ष 2000 के अंकपत्रों की है, जिसके लिए एक हजार ब्लैंक मार्कशीट छापने की अनुमति मांगी गई है।
छात्रों को नौकरी और प्रवेश में हो रही दिक्कत
अंकसूली में मामूली त्रुटियों के कारण कई छात्र दस्तावेज सत्यापन और रोजगार प्रक्रियाओं में अटक गए हैं। कुछ छात्रों ने दो साल पहले आवेदन दिया था, लेकिन अब तक उन्हें संशोधित अंकसूली नहीं मिल सकी है।
शिक्षाविदों का कहना है कि दोनों राज्यों के शिक्षा मंडलों को आपसी समन्वय से इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए। जरूरत पड़ने पर दोनों राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को भी हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
मध्य प्रदेश बोर्ड ने समाधान का दिया भरोसा
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों का कहना है कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है और इसे जल्द सुलझाया जा सकता है। यदि कोरी स्टेशनरी उपलब्ध नहीं है तो नई स्टेशनरी छापने या एनओसी देने पर विचार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल को उम्मीद है कि दोनों राज्यों के बीच समन्वय बनने पर लंबे समय से लंबित 351 छात्रों की संशोधित अंकसूली जल्द जारी की जा सकेगी ।





