सीजी भास्कर, 21 जून : राजधानी रायपुर के सदर बाजार स्थित ऐतिहासिक मोती भवन (Moti Bhavan Raipur) एक बार फिर चर्चा में है। कभी प्रदेश की राजनीति का अहम केंद्र माने जाने वाले इस भवन पर अब नगर निगम और लोक अदालत का नोटिस चस्पा किया गया है। संपत्तिकर बकाया होने के कारण की गई इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है।
मोती भवन का नाम प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा से जुड़ा रहा है। एक समय ऐसा था जब यहां से प्रदेश की राजनीति की दिशा तय होती थी, लेकिन आज यह भवन वीरान और जर्जर हालत में खड़ा दिखाई देता है।
राजनीतिक रणनीतियों का केंद्र था मोती भवन
सदर बाजार स्थित मोती भवन लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के राजनीतिक जीवन के दौरान यहां नेताओं, कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की लगातार आवाजाही बनी रहती थी। कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का साक्षी रहा यह भवन प्रदेश की राजनीति में विशेष पहचान रखता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय मोती भवन में दिनभर राजनीतिक हलचल रहती थी। चुनावी रणनीति से लेकर संगठनात्मक बैठकों तक कई बड़े फैसले इसी भवन में लिए जाते थे।
संपत्तिकर बकाया होने पर निगम की कार्रवाई
नगर निगम रायपुर के जोन-4 कार्यालय की ओर से भवन पर संपत्तिकर बकाया होने के कारण नोटिस जारी किया गया है। निगम और लोक अदालत की ओर से चस्पा किए गए नोटिस में कर भुगतान से संबंधित जानकारी दी गई है।
जानकारी के अनुसार भवन लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है और इसका नियमित उपयोग नहीं हो रहा है। इसी कारण संपत्ति से जुड़े कई प्रशासनिक और कर संबंधी मामले लंबित बताए जा रहे हैं।
जर्जर हालत में खड़ी है राजनीतिक विरासत
मोतीलाल वोरा के निधन के बाद से मोती भवन लगभग सूना पड़ा हुआ है। भवन की देखरेख और रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई। वर्तमान में भवन के कई हिस्सों में जर्जरता के निशान साफ दिखाई देते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक विरासत का हिस्सा है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण और रखरखाव को लेकर गंभीर पहल की जरूरत है।
विरासत संरक्षण पर उठे सवाल
मोती भवन पर नोटिस लगने के बाद शहर में राजनीतिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक भवनों के संरक्षण को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। लोगों का मानना है कि जिन स्थानों ने प्रदेश की राजनीति को दिशा दी, उन्हें संरक्षित रखने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा का निधन दिसंबर 2020 में हुआ था। उनके निधन के बाद से भवन की गतिविधियां लगभग बंद हो गईं और अब यह संपत्तिकर बकाया को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहा है।





