सीजी भास्कर, 21 जून : बस्तर संभाग के दुर्गम और नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में मानसून (Abujhmad Advance Ration Storage) की दस्तक से पहले जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। भारी बारिश के दौरान सड़क संपर्क बाधित होने और कई गांवों के पहुंचविहीन हो जाने की स्थिति को देखते हुए जिले की 39 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में तीन माह का अग्रिम खाद्यान्न भंडारित कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बारिश के दिनों में भी दूरस्थ ग्रामीणों को राशन के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बारिश में भी नहीं रुकेगा खाद्यान्न वितरण
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान खाद्यान्न वितरण व्यवस्था किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। अबूझमाड़ के कई गांव ऐसे हैं जहां बारिश शुरू होते ही नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं और सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे हालात में ग्रामीणों को आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए समय रहते अग्रिम भंडारण की व्यवस्था की गई है।
राशन की बोरियों का हो रहा भौतिक सत्यापन
जिला प्रशासन केवल खाद्यान्न पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण व्यवस्था की नियमित निगरानी भी कर रहा है। इसके लिए विभिन्न अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो स्वयं दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर राशन के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। राशन की बोरियों की संख्या, भंडारण की स्थिति और वितरण व्यवस्था का मौके पर निरीक्षण किया जा रहा है।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर अधिकारियों ने लिया जायजा
कलेक्टर के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग के उप संचालक एवं नोडल अधिकारी ने ओरछा विकासखंड के अंदरूनी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत हांदावाड़ा के बेड़मापारा राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तीन माह के लिए सुरक्षित रखे गए खाद्यान्न के स्टॉक की जांच की गई। साथ ही भंडारण व्यवस्था, सुरक्षा मानकों और वितरण प्रक्रिया का भी अवलोकन किया गया।
39 दुकानों में सौ प्रतिशत अग्रिम भंडारण पूरा
खाद्य विभाग के अनुसार जिले की सभी 39 पहुंचविहीन उचित मूल्य दुकानों में शत-प्रतिशत अग्रिम भंडारण का कार्य समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है। व्यवस्था की निगरानी के लिए जिला स्तर के अधिकारियों की दुकानवार जिम्मेदारी तय की गई है, जो लगातार निरीक्षण और समीक्षा कर रहे हैं।
हजारों ग्रामीणों को मिलेगी राहत
अबूझमाड़ के आश्रित गांवों में रहने वाले हजारों राशन कार्डधारियों को इस व्यवस्था से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि भौगोलिक चुनौतियां चाहे जितनी कठिन हों, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकार और आवश्यक सेवाएं हर हाल में उन तक पहुंचाई जाएंगी।





