सीजी भास्कर, 21 जून। देश में नशे और उससे जुड़े कानूनों पर चर्चा नई नहीं है, लेकिन इन दिनों गांजा को लेकर बहस फिर तेज (Cannabis Law) हो गई है। अदालत के निर्देश के बाद नीति विशेषज्ञों, डॉक्टरों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। कई जगहों पर इस विषय को लेकर चर्चा का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक हो गया है।
सरकार के सामने अब एक अहम फैसला आने वाला है। अदालत की तय समयसीमा धीरे धीरे करीब पहुंच रही है और इसी के साथ लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गांजा से जुड़े नियमों में कोई ढील दी जाएगी या फिर मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखा जाएगा। इस मुद्दे ने कानूनी, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी बहस को एक साथ खड़ा कर दिया है।
करीब पांच महीने पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को कैनाबिस से जुड़े कानूनों की व्यापक समीक्षा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने छह महीने के भीतर यह तय करने को कहा था कि मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं। अब यह समयसीमा जुलाई 2026 के करीब पहुंच चुकी है।
अदालत ने क्या कहा : Cannabis Law
23 जनवरी को दिए गए आदेश में अदालत ने खुद कैनाबिस को वैध या अवैध घोषित करने पर कोई फैसला नहीं दिया। इसके बजाय केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया कि वह सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करे और यह जांचे कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत मौजूद प्रावधानों में किसी प्रकार की ढील देने की जरूरत है या नहीं।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि कानून में बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है तो उसके उद्देश्य और प्रभावों का भी आकलन किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया के लिए विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थाओं से परामर्श करने की बात कही गई है।
समीक्षा की मांग क्यों उठी
यह मामला एक ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका के जरिए सामने आया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दुनिया के कई देशों में कैनाबिस को लेकर नियम बदल रहे हैं और वैज्ञानिक शोध भी इसके कुछ नियंत्रित उपयोगों की ओर संकेत करते हैं। ऐसे में भारत में भी पुराने कानूनों की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।
याचिका में यह तर्क भी रखा गया कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और बदलते वैश्विक दृष्टिकोण को देखते हुए इस विषय पर नई सोच की जरूरत है।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि भारत में कैनाबिस पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। चिकित्सा, वैज्ञानिक, औद्योगिक और अनुसंधान संबंधी उद्देश्यों के लिए नियंत्रित परिस्थितियों में इसके उपयोग की व्यवस्था पहले से मौजूद है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में इसकी खेती और उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। इसी कारण भारत की स्थिति पूर्ण प्रतिबंध वाले देशों से अलग मानी जाती है।
देश में कितना है उपयोग
सरकार की ओर से अदालत में रखे गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, देश में करोड़ों लोगों ने पिछले एक वर्ष के दौरान किसी न किसी रूप में कैनाबिस उत्पाद का उपयोग किया था।
इसी वजह से यह विषय केवल कानूनी बहस तक सीमित (Cannabis Law) नहीं है। कानून लागू करने वाली एजेंसियां लगातार बड़ी मात्रा में गांजा जब्त करती रही हैं। कई राज्यों में अवैध खेती और तस्करी के मामले भी सामने आते रहे हैं।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों को लंबे समय से गांजा उत्पादन वाले क्षेत्रों के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी समय समय पर अवैध खेती पकड़ी गई है।
राज्यों की अलग अलग व्यवस्था
भारत में कैनाबिस से जुड़े सभी उत्पादों के लिए एक जैसा नियम लागू नहीं है। कुछ राज्यों ने औद्योगिक हेम्प या भांग की नियंत्रित खेती को अनुमति दी है।
उत्तराखंड पहले ही औद्योगिक उपयोग के लिए हेम्प खेती की अनुमति दे चुका है। वहीं मध्य प्रदेश ने चिकित्सा और औद्योगिक जरूरतों के लिए खेती को लेकर योजनाएं सामने रखी हैं। कई राज्यों में भांग की बिक्री अलग नियमों के तहत नियंत्रित की जाती है।
दुनिया में क्या बदल रहा है
पिछले एक दशक में कई देशों ने कैनाबिस नीति में बदलाव किए हैं। कुछ देशों ने चिकित्सा उपयोग की अनुमति दी है जबकि कुछ ने सीमित व्यक्तिगत उपयोग को वैध बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस विषय पर चर्चा बढ़ी है। विभिन्न स्वास्थ्य और नीति संस्थानों ने कैनाबिस से जुड़े नियमों की समीक्षा पर विचार रखने शुरू किए हैं। इसी वैश्विक बदलाव का असर भारत की बहस पर भी दिखाई दे रहा है।
जोखिम को लेकर भी चिंता
हालांकि नियमों में ढील की मांग के साथ कई चिंताएं भी सामने आती हैं। विशेषज्ञ युवाओं तक इसकी पहुंच, लत लगने की संभावना, सड़क सुरक्षा और अवैध कारोबार जैसे मुद्दों को गंभीर मानते हैं।
सरकार ने भी अदालत के सामने कहा है कि कमजोर निगरानी व्यवस्था होने पर चिकित्सा उपयोग के नाम पर गैर कानूनी इस्तेमाल बढ़ (Cannabis Law) सकता है। इसी वजह से किसी भी संभावित बदलाव को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले समय में यह स्पष्ट हो सकता है कि मौजूदा नियम जारी रहेंगे या चिकित्सा और औद्योगिक उपयोग के लिए सीमित बदलाव किए जाएंगे। फैसला चाहे जो भी हो, इतना तय है कि गांजा नीति को लेकर देश में शुरू हुई यह बहस अब पहले से कहीं अधिक गंभीर हो चुकी है।





