सीजी भास्कर, 22 जून : दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और असीम पर्यटन संभावनाओं (Dholkal Trekking Route Dantewada) को राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। जिले के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक ढोलकल क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित ‘ढोलकल ट्रैकिंग रूट’ का भव्य लोकार्पण कर दिया गया है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के मद से लगभग 61.05 लाख रुपए की भारी लागत से विकसित किए गए इस खूबसूरत और सुरक्षित ट्रैकिंग रूट का लोकार्पण प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने किया।
युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने और रहस्यमयी जंगलों के साथ-साथ धार्मिक व आध्यात्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है। ढोलकल (Dholkal Trekking Route Dantewada) ट्रैकिंग रूट के विधिवत शुरू होने से बस्तर अंचल में एडवेंचर टूरिज्म यानी साहसिक पर्यटन को एक जबरदस्त और नई रफ्तार मिलेगी।
इस रूट के चालू होने का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय आदिवासी युवाओं को होगा, क्योंकि पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से उनके लिए गाइड, लॉजिस्टिक्स और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह पूरी परियोजना क्षेत्र की अनूठी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
पर्यटकों का सफर होगा आसान
पहाड़ियों, ऊंचे पेड़ों और प्राकृतिक वादियों से घिरे होने के कारण अब तक ढोलकल शिखर तक पहुंचना काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण माना जाता था। लेकिन अब इस नए ट्रैकिंग रूट के तैयार हो जाने से प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए यह सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम, सुविधाजनक और सुरक्षित हो गया है।
इस रूट के निर्माण में प्रकृति और आधुनिक सुविधाओं का ऐसा तालमेल बिठाया गया है जिससे पर्यटकों को बिना किसी परेशानी के बस्तर के घने जंगलों को बेहद करीब से देखने और महसूस करने का एक अनोखा व यादगार अनुभव मिल सकेगा। कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बस्तर के नागरिकों ने भारी उत्साह जताते हुए कहा कि यह पहल दंतेवाड़ा को छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल करने का काम करेगी। यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यटन विकास के लिए जरूरी है, बल्कि इसमें स्थानीय समुदाय की सीधी भागीदारी होने से प्रकृति के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।





