सीजी भास्कर, 07 अगस्त। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत (Bhupesh Baghel) नहीं मिल सकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई आगे जारी रहेगी। (Bhupesh Baghel Election Petition)
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि भूपेश बघेल चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक तर्क रखने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। ऐसे में अब यह मामला संबंधित अदालत में साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगा।
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पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा है मामला : Bhupesh Baghel Election Petition
यह मामला वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका से जुड़ा है। यह याचिका भाजपा नेता और उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी विजय बघेल की ओर से दायर की गई है।
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मौन अवधि में रोड शो का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदान से 48 घंटे पहले लागू मौन अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने रोड शो किया, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 का उल्लंघन है।
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सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई दलील : Bhupesh Baghel Election Petition
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यदि आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तब भी यह अधिकतम चुनावी अपराध का मामला हो सकता है, इसे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कथित रोड शो का चुनाव परिणाम पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि भूपेश बघेल ने लगभग 20 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। साथ ही उन्होंने यह भी दलील दी कि उस समय भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे और उन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त थी।
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कोर्ट ने सुनवाई जारी रखने के दिए संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कथित उल्लंघन से चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ या नहीं, इसका निर्णय साक्ष्यों और तथ्यों (Bhupesh Baghel Election Petition) के आधार पर होगा। अदालत ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल अपने सभी कानूनी अधिकारों और बचाव के तर्क प्रस्तुत कर सकेंगे। अब पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका पर आगे की सुनवाई संबंधित न्यायालय में जारी रहेगी।
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