सीजी भास्कर, 26 जून : छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल रायपुर मेडिकल कॉलेज में Raipur Medical College Faculty Shortage की समस्या और गहरा गई है। राज्य सरकार द्वारा 21 डॉक्टरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किए जाने के बाद इनमें से 17 प्रोफेसरों का विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया है। इससे पहले से ही फैकल्टी की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज में शिक्षण व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
166 पद पहले से रिक्त, मेडिकल शिक्षा पर बढ़ रहा दबाव
रायपुर मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों के कुल 417 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 166 पद अभी भी रिक्त हैं। वर्तमान में केवल 251 डॉक्टर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इनमें 156 नियमित और 95 संविदा चिकित्सक शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैकल्टी की कमी का सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, शोध कार्य और पीजी पाठ्यक्रमों पर पड़ता है। वर्ष 2025 में भी सर्जरी विभाग में शिक्षकों की कमी के कारण पीजी की दो सीटें घटानी पड़ी थीं, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ा था।
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में भी आधे से ज्यादा पद खाली
फैकल्टी की कमी केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक सरकारी डेंटल कॉलेज में कुल 1,934 स्वीकृत पदों में से 985 पद रिक्त हैं। यानी करीब 51 प्रतिशत पद खाली हैं। वहीं रायपुर के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल और बिलासपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भी कुल 139 स्वीकृत पदों में से 81 पद खाली हैं। इसका असर मरीजों के उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
कई प्रमुख विभागों के प्रोफेसरों का हुआ तबादला
स्थानांतरित किए गए प्रोफेसर फॉरेंसिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, प्रसूति एवं स्त्री रोग (गायनिक), ईएनटी, सर्जरी, दंतरोग, एनेस्थीसिया, चर्म रोग और रेडियोथेरेपी जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े हैं। इन चिकित्सकों की नई पदस्थापना कवर्धा, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, महासमुंद, दुर्ग, कांकेर और बिलासपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की गई है, ताकि वहां चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिल सके।
नियमित भर्ती की मांग तेज
चिकित्सा विशेषज्ञों और फैकल्टी का मानना है कि केवल तबादलों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए नियमित भर्ती के माध्यम से पर्याप्त संख्या में शिक्षकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति आवश्यक है। बताया जा रहा है कि पिछले ढाई वर्षों में आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल से 100 से अधिक डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां नहीं की गईं, तो मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, पीजी सीटों की संख्या और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती रहेंगी।



