सीजी भास्कर, 15 जून। धमतरी जिले के एक गांव में इन दिनों एक युवा किसान की सफलता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी (Dutch Rose Farming) हुई है। पढ़ाई पूरी करने के बाद जहां ज्यादातर युवा नौकरी की तलाश में बड़े शहरों का रुख करते हैं, वहीं इस युवक ने गांव में रहकर खेती को अपना भविष्य बनाने का फैसला किया। शुरुआत आसान नहीं रही, लेकिन आज उसकी मेहनत रंग ला रही है।
आसपास के किसान भी इस मॉडल को देखने और समझने पहुंच रहे हैं। आधुनिक तकनीक के सहारे की जा रही खेती ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना और धैर्य के साथ कृषि क्षेत्र में भी शानदार आय अर्जित की जा सकती है। यही वजह है कि अब यह पहल क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।
प्रबंधन की पढ़ाई के बाद चुना खेती का रास्ता : Dutch Rose Farming
धमतरी जिले के खरतुली गांव के किसान मोहित पवार ने निजी क्षेत्र में करियर बनाने के बजाय आधुनिक कृषि को चुना। प्रबंधन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक एकड़ भूमि पर डच गुलाब की वैज्ञानिक खेती शुरू की। आज उनकी यह पहल सफल व्यवसाय का रूप ले चुकी है और इससे उन्हें हर वर्ष लगभग 13 से 15 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।
ऋण लेकर शुरू किया बड़ा प्रोजेक्ट
इस खेती को शुरू करने के लिए बड़ी निवेश राशि की जरूरत थी। मोहित ने बैंक से 65 लाख रुपये का कृषि ऋण प्राप्त कर पॉली हाउस और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित कीं। अप्रैल 2025 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं। तकनीकी अनुभव की कमी और रखरखाव संबंधी समस्याओं के कारण शुरुआती उत्पादन प्रभावित हुआ, लेकिन बाद में बेहतर प्रबंधन से स्थिति बदल गई।
रोज तैयार हो रहे हजारों फूल
वर्तमान में पॉली हाउस से प्रतिदिन औसतन 12 किलो फूलों का उत्पादन हो रहा है। इससे रोजाना लगभग 1000 से 1500 फूलों की डंडियां बाजार के लिए तैयार की जाती हैं। शादी विवाह और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से बिक्री में भी अच्छा इजाफा देखने को मिलता है। तैयार फूलों की आपूर्ति रायपुर के माध्यम से अन्य राज्यों के बाजारों तक की जा रही है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ी उत्पादन क्षमता
खेती के लिए उन्नत किस्म के पौधे बाहर से मंगाए गए हैं और उन्हें तापमान नियंत्रित पॉली हाउस में लगाया गया है। बेहतर उत्पादन के लिए आधुनिक सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया (Dutch Rose Farming) जा रहा है। इस तकनीक की मदद से कम पानी में भी अच्छी गुणवत्ता वाले फूलों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे लागत नियंत्रित रखने में सहायता मिल रही है।
कम पानी में ज्यादा मुनाफा
सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक अपनाई गई है, जिससे पानी की खपत काफी कम हो गई है। गर्मी के मौसम में भी सीमित पानी से फसल की जरूरत पूरी हो जाती है, जबकि ठंड के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता और कम हो जाती है।
बेहतर उत्पादन और मजबूत बाजार व्यवस्था के कारण इस खेती से सालाना 15 से 18 लाख रुपये तक की आय प्राप्त (Dutch Rose Farming) हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी लाभदायक साबित हो सकता है और आधुनिक खेती की दिशा में नई सोच विकसित कर सकता है।





