सीजी भास्कर, 27 जून : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने (Rape Victim Compensation Rules) से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए दुष्कर्म और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब मुआवजे की अगली किस्त जारी करने से पहले पीड़िता को शपथ पत्र देना होगा कि वह आरोपी से समझौता नहीं करेगी और न्यायालय में अपने बयान से पीछे नहीं हटेगी।
आर्थिक सहायता के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि कई मामलों में देखा गया है कि पीड़ित पक्ष आर्थिक सहायता प्राप्त करने के बाद ट्रायल के दौरान अपने बयान बदल देता है। इससे अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ जाता है और सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुआवजा जारी करने से पहले देना होगा शपथ पत्र
अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी आर्थिक सहायता की अगली किस्त जारी करने से पहले पीड़िता से विधिवत हलफनामा प्राप्त करेंगे। इस हलफनामे में यह उल्लेख होगा कि वह आरोपी से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और न्यायालय में अपने बयान का समर्थन करेगी।
बयान से मुकरने पर लौटानी होगी पूरी सहायता राशि
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि ट्रायल के दौरान पीड़िता अपने बयान से मुकरती है या आरोपों का समर्थन नहीं करती है, तो उसे न्यायालय के निर्णय के 30 दिनों के भीतर सरकार से प्राप्त पूरी आर्थिक सहायता राशि वापस करनी होगी।
राशि वापस नहीं करने पर होगी कानूनी वसूली
अदालत ने यह भी कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा में सहायता राशि वापस नहीं की जाती है, तो उसकी विधिसम्मत वसूली की जाएगी। साथ ही ट्रायल कोर्ट उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी कार्रवाई स्वतंत्र रूप से जारी रख सकेगा।



