सीजी भास्कर, 28 जून। देशभर में आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने के लिए सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को एकीकृत कर केवल डायल-112 के तहत संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। जल्द ही डायल-100, 101, 102, 108, 1033, 1091 सहित अन्य सभी आपातकालीन नंबर 112 में समाहित किए जाएंगे। (Unified Emergency Number 112)
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर इस व्यवस्था को लागू करने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ गृह विभाग ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर एकीकृत इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करना शुरू कर दिया है।
राज्य में वर्तमान में डायल-112 की लगभग 400 और 108 एंबुलेंस सेवा की करीब 375 गाड़ियां संचालित हो रही हैं। अभी पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सहायता के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं के माध्यम से सूचनाएं भेजी जाती हैं। नई व्यवस्था (Unified Emergency Number 112) लागू होने के बाद सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित होंगी, जिससे सूचना के आदान-प्रदान में लगने वाला समय कम होगा और आपात स्थिति में लोगों को तेजी से सहायता मिल सकेगी।
छत्तीसगढ़ में डायल-112 सेवा वर्ष 2018 में शुरू की गई थी, जिसे बाद में राज्य के सभी 33 जिलों तक विस्तारित किया गया। वर्तमान में किसी भी आपात स्थिति में डायल-112 पर कॉल आने के बाद कॉल सेंटर संबंधित विभागों को सूचना भेजता है। अब इस प्रक्रिया (Unified Emergency Number 112) को पूरी तरह एकीकृत किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है। अदालत ने कैशलेस इलाज, गुड सेमेरिटन सुरक्षा व्यवस्था, सभी एंबुलेंस में जीपीएस और वीएलटीडी, प्रशिक्षित पैरामेडिक्स, ट्रॉमा रजिस्ट्री, अस्पतालों की ग्रेडिंग और बहुभाषी जनजागरूकता अभियान जैसे निर्देश भी दिए हैं। सरकार का मानना है कि एकीकृत डायल-112 प्रणाली लागू होने से आपातकालीन सेवाएं अधिक तेज, सरल और प्रभावी बनेंगी।



