सीजी भास्कर, 29 जून। भिलाई नगर निगम के वार्ड-22 कुरूद में हुए निर्माण कार्य अब विधानसभा तक पहुंच गए हैं। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में लगाए गए अतारांकित प्रश्न ने नगर निगम और संबंधित अधिकारियों में हलचल बढ़ा दी है। प्रश्न में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, अनियमितता, शिकायतों की स्थिति और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। (Construction Irregularities)
यदि सरकार सदन में इस प्रश्न का विस्तृत उत्तर देती है, तो कई निर्माण कार्यों की जांच और जिम्मेदारी तय होने की संभावना भी बढ़ सकती है।
क्या होता है अतारांकित प्रश्न?
विधानसभा में सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न दो प्रकार के होते हैं—
तारांकित प्रश्न – जिनका उत्तर मंत्री सदन में मौखिक रूप से देते हैं और पूरक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।
अतारांकित प्रश्न – जिनका उत्तर लिखित रूप में दिया जाता है। हालांकि इस पर पूरक प्रश्न नहीं पूछे जाते, लेकिन विभाग को सभी तथ्यों के साथ जवाब तैयार करना पड़ता है।
यही कारण है कि संबंधित विभागों को रिकॉर्ड खंगालने पड़ते हैं और कई बार लंबित मामलों की भी समीक्षा शुरू हो जाती है।
Construction Irregularities : विधायक रिकेश सेन ने क्या पूछा?
विधानसभा सचिवालय में लगाए गए प्रश्न क्रमांक 463 में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से पूछा गया है कि—
यदि शिकायतें मिली हैं तो उनकी जांच किस स्तर पर हुई?
किन-किन कार्यों में तकनीकी अनियमितता पाई गई?
संबंधित कार्यों की लागत, वार्ड क्रमांक और निर्माण एजेंसी का विवरण क्या है?
दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है? यदि नहीं हुई तो उसका कारण क्या है?
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रश्न?
यह केवल एक वार्ड का मामला नहीं माना जा रहा है। दरअसल, यदि सरकार जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सदन में प्रस्तुत करती है तो इससे नगर निगम में हुए अन्य निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
इसके अलावा, लिखित उत्तर विधानसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाता है। इसलिए विभाग को तथ्यात्मक और दस्तावेज आधारित जवाब देना होता है।
अधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी : Construction Irregularities
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा से प्रश्न प्राप्त होने के बाद संबंधित विभागों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अब अधिकारियों को शिकायतों, जांच रिपोर्ट, तकनीकी परीक्षण और कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज संकलित कर सरकार को उपलब्ध कराने होंगे।
यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
विधानसभा में उठाया गया यह प्रश्न संकेत देता है कि स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता अब सीधे सदन में भी जवाबदेही के दायरे में लाई जा रही है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक संदेश भी जाता है कि सार्वजनिक धन से होने वाले कार्यों की निगरानी लगातार की जाएगी।

आपको बता दें कि वार्ड-22 कुरूद के निर्माण कार्यों को लेकर विधायक रिकेश सेन द्वारा लगाया गया अतारांकित प्रश्न फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर सरकार के लिखित उत्तर पर रहेगी, क्योंकि उसी से स्पष्ट होगा कि शिकायतों की वास्तविक स्थिति क्या है, जांच कहां तक पहुंची है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई है।



