सीजी भास्कर, 03 जुलाई : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत नहीं मिलने का बड़ा कारण सामने आया है। ईंधन मूल्य (Fuel Price News) को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की बिक्री पर कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है। यानी कंपनियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं।
डीजल पर सबसे ज्यादा हुआ नुकसान
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पेट्रोल की बिक्री पर 19,905 करोड़ रुपये, डीजल पर 1.44 लाख करोड़ रुपये और एलपीजी (LPG) पर 24,148 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई है। इसके अलावा पिछली तिमाहियों से एलपीजी पर 30,720 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी कंपनियों पर बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की खरीद महंगी हुई, लेकिन आम उपभोक्ताओं पर इसका पूरा भार नहीं डाला गया।
40 दिनों में 28% सस्ता हुआ कच्चा तेल
पिछले करीब 40 दिनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल में जहां कच्चे तेल का भाव करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल रह गया है।
इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई कमी नहीं आने से आम लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब कच्चा तेल सस्ता हो गया है तो ईंधन की कीमतें क्यों नहीं घट रहीं।
कब मिल सकती है राहत?
हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिए कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो सरकार और तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत देने पर विचार कर सकती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल पंपों पर बिक रहा ईंधन दो महीने पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल से तैयार किया गया है। इसलिए सस्ते कच्चे तेल का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा।
मई में बढ़ाए गए थे दाम
तेल कंपनियों ने बढ़ती लागत और लगातार हो रही अंडर-रिकवरी को देखते हुए 15 मई को पेट्रोल की कीमत में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 7.52 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। करीब चार वर्षों बाद ईंधन की कीमतों में यह पहली बड़ी वृद्धि थी।
अब उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहने पर सरकार कब पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत देती है।



