सीजी भास्कर, 03 जुलाई : संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session 2026) 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चल सकता है। करीब चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों को सदन में पेश कर सकती है। वहीं विपक्ष भी महंगाई, बेरोजगारी, NEET विवाद, सूखा-बाढ़ और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
लोकसभा में बदल सकता है दलों का समीकरण
संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session 2026) शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष के कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर भी राजनीतिक दलों की नजर टिकी हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के संभावित विलय और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से जुड़े मामलों पर फैसला आ सकता है। इससे लोकसभा के सिटिंग प्लान और दलों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है।
महिला आरक्षण और One Nation One Election पर सरकार का फोकस
सरकार इस सत्र में कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इनमें महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक प्रमुख माना जा रहा है। इसके अलावा One Nation One Election से जुड़े विधेयकों को भी संसद में आगे बढ़ाने की संभावना है। सरकार एफसीआरए संशोधन (FCRA Amendment), विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, एंटी डोपिंग बिल, कॉर्पोरेट लॉ और सिक्योरिटीज मार्केट कोड जैसे महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश कर सकती है।
संवैधानिक संशोधनों पर भी रहेगी नजर
सूत्रों के अनुसार सरकार दो महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों पर भी आगे बढ़ सकती है। इनमें लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव शामिल बताया जा रहा है। वहीं 30 दिन से अधिक की सजा मिलने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद पर बने रहने से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा संभव है।
महंगाई, बेरोजगारी और NEET पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session 2026) विपक्ष के लिए भी सरकार को घेरने का बड़ा मंच बनने वाला है। विपक्ष महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी, NEET परीक्षा विवाद, सूखा-बाढ़ की स्थिति और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान (SIR) और क्षेत्रीय दलों में टूट के पीछे कथित राजनीतिक हस्तक्षेप का मुद्दा भी विपक्ष संसद में उठा सकता है।



