सीजी भास्कर, 04 जुलाई : जलवायु परिवर्तन ( Climate Change) के बढ़ते प्रभाव के बीच किसानों की आय बढ़ाने और कम लागत में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से धमतरी जिले में ग्राफ्टेड (कलमी) सब्जियों की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने की बड़ी पहल की गई है। नगरी विकासखंड के ग्राम केरेमुड़ा में ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की आधुनिक खेती पर एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन प्रदान (PRADAN) संस्था ने किया।
नगरी और मगरलोड के किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में नगरी और मगरलोड विकासखंड की कृषि सखियों, मास्टर ट्रेनर्स और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को ग्राफ्टेड सब्जी उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से परिचित कराना तथा उन्हें जलवायु-अनुकूल, टिकाऊ और अधिक लाभदायक खेती के लिए प्रेरित करना था।
1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधों का किया गया वितरण
आजीविका मिशन के तहत नगरी विकासखंड के किसानों को कुल 1 लाख 1 हजार 800 ग्राफ्टेड पौधों का वितरण किया गया। इनमें 51 हजार 800 ग्राफ्टेड टमाटर तथा 50 हजार ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि ग्राफ्टेड पौधों की जड़ प्रणाली सामान्य पौधों की तुलना में अधिक मजबूत होती है। इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहती है और ये प्रतिकूल मौसम में भी अच्छी वृद्धि करते हैं। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को बेहतर गुणवत्ता की फसल और अधिक आय प्राप्त होती है।
ग्राफ्टिंग तकनीक से घटेगी बीमारी, बढ़ेगी पैदावार
विशेषज्ञों ने बताया कि ग्राफ्टिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें मजबूत जड़ वाले पौधे (रूटस्टॉक) पर अधिक उत्पादन देने वाली किस्म (सायन) को जोड़कर नया पौधा तैयार किया जाता है। इससे पौधों में रोगों का प्रकोप कम होता है, पौधों की उम्र बढ़ती है और उत्पादन सामान्य खेती की तुलना में काफी अधिक प्राप्त होता है।
खेत में कराया गया लाइव डेमोंस्ट्रेशन
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि खेत में लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से भूमि की तैयारी, पौध उपचार, वैज्ञानिक रोपाई, मल्चिंग, नमी संरक्षण तथा जैविक खेती की तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों ने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), मृदा स्वास्थ्य सुधार, जैव उर्वरकों के उपयोग तथा फसल कटाई के बाद प्रबंधन की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। संवाद सत्र में किसानों की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान भी मौके पर उपलब्ध कराया गया।
FPO और PRADAN की अहम भूमिका
इस पहल को सफल बनाने में गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। FPO के माध्यम से किसानों को उन्नत ग्राफ्टेड पौधे और आवश्यक जैविक कृषि सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं PRADAN संस्था द्वारा कृषि सखियों और किसानों को पूरे फसल चक्र के दौरान लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में प्रशासन, FPO और PRADAN की यह संयुक्त पहल नगरी और मगरलोड क्षेत्र में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में उभर रही है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण आजीविका और स्थानीय पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।



