सीजी भास्कर, 05 जुलाई : नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बिलासपुर जिले के कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को अब तक नई पाठ्य पुस्तकें (Bilaspur School Books) नहीं मिल सकी हैं। स्कूलों में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन हजारों छात्र बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इससे पढ़ाई की गति प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों को पुरानी पुस्तकों, नोट्स तथा शिक्षकों के मौखिक मार्गदर्शन के सहारे अध्ययन करना पड़ रहा है।
तीन लाख छात्रों को 15 लाख किताबों का इंतजार
जानकारी के अनुसार बिलासपुर जिले में करीब तीन लाख विद्यार्थियों के लिए लगभग 15 लाख पाठ्य पुस्तकों की आवश्यकता है। राज्य सरकार की योजना के तहत कक्षा पहली से दसवीं तक के छात्रों को निःशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन इस वर्ष वितरण प्रक्रिया में देरी होने से अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों को पूरी पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं।
कागज विवाद से प्रभावित हुई छपाई प्रक्रिया
पाठ्य पुस्तकों की छपाई और वितरण में देरी के पीछे 70 और 80 जीएसएम कागज को लेकर उत्पन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक विवाद प्रमुख कारण माना जा रहा है। नई शैक्षणिक पुस्तकों के प्रकाशन में राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप बदलाव किए गए, जिससे टेंडर प्रक्रिया और छपाई का कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका।
पहले पुस्तकों की छपाई 70 जीएसएम कागज पर होती थी, जबकि इस बार 80 जीएसएम कागज के उपयोग का प्रस्ताव रखा गया था। बाद में पुस्तकों के बढ़ते वजन और छात्रों के बस्तों पर अतिरिक्त बोझ की आशंका को देखते हुए प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
अभिभावकों ने जताई चिंता
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग को नए शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए थीं। उनका कहना है कि किताबों की अनुपलब्धता से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों के छात्रों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जल्द शुरू होगा वितरण
जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने बताया कि नई पाठ्य पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं और उनका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों सहित जिले के अन्य शासकीय विद्यालयों में भी अगले कुछ दिनों के भीतर किताबें पहुंचा दी जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को नियमित रूप से अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।



