सीजी भास्कर, 05 जुलाई। शेयर बाजार में निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 1 अगस्त से ओपन मार्केट शेयर बायबैक को दोबारा मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद निवेशकों के पास अपने शेयर बेचने का एक और पारदर्शी विकल्प उपलब्ध होगा। पहले सेबी इस व्यवस्था को पूरी तरह बंद करने की तैयारी में था, लेकिन टैक्स नियमों में बदलाव के बाद उसने अपना फैसला बदल दिया है। (SEBI open market buyback)
सेबी ने क्यों बदला फैसला? : SEBI open market buyback
पहले सेबी का मानना था कि पुराने टैक्स नियमों के कारण ओपन मार्केट बायबैक और टेंडर ऑफर के बीच असमानता पैदा हो रही थी। लेकिन अब यूनिफॉर्म टैक्सेशन लागू होने के बाद यह अंतर खत्म हो गया है। इसी वजह से सेबी ने ओपन मार्केट बायबैक को फिर से मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य कंपनियों की लागत कम करना, बायबैक प्रक्रिया को तेज बनाना और बाजार में गिरावट के दौरान शेयरों को सहारा देना है।
क्या होता है शेयर बायबैक?
जब कोई सूचीबद्ध कंपनी अपने ही निवेशकों से बाजार में मौजूद शेयर वापस खरीदती है, तो इसे शेयर बायबैक कहा जाता है। खरीदे गए शेयरों को आमतौर पर कंपनी रद्द कर देती है, जिससे बाजार में कुल शेयरों की संख्या घट जाती है। इससे कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) बेहतर हो सकती है और लंबे समय में शेयरधारकों को लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है।
टेंडर ऑफर और ओपन मार्केट बायबैक में अंतर : SEBI open market buyback
टेंडर ऑफर में कंपनी पहले से तय कीमत पर निवेशकों से शेयर खरीदती है। वहीं, ओपन मार्केट बायबैक में कंपनी सामान्य ट्रेडिंग की तरह शेयर बाजार से धीरे-धीरे शेयर खरीदती है।
कंपनी पहले बायबैक की आधिकारिक घोषणा करती है।
अधिकतम खरीदे जाने वाले शेयरों की संख्या बताई जाती है।
बायबैक के लिए तय फंड और समयसीमा भी घोषित की जाती है।
खरीदारी शेयर बाजार के जरिए सामान्य ट्रेडिंग की तरह होती है।
निवेशकों को क्या होगा फायदा?
यदि आपके पास उस कंपनी के शेयर हैं, जो ओपन मार्केट बायबैक ला रही है, तो आप बाजार (SEBI open market buyback) के जरिए अपने शेयर बेच सकते हैं। हालांकि, इसमें शेयर बिकने की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं होती, क्योंकि आपका सेल ऑर्डर तभी पूरा होगा जब कंपनी या कोई अन्य खरीदार उसी कीमत पर शेयर खरीदने को तैयार होगा।



