सीजी भास्कर, 28 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाले एक दंपति को सुरक्षा देने के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कोरबा जिले के पुलिस अधीक्षक को स्पष्ट आदेश दिया कि दंपति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की हानि न होने दी जाए। साथ ही, शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। (High Court grants protection to love marriage couple)
दंपति को मिल रही थी गंभीर धमकियां : High Court grants protection to love marriage couple
याचिकाकर्ता दंपति ने अदालत में बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से विवाह किया है, लेकिन इसके बाद लड़की के परिवार की ओर से लगातार ऑनर किलिंग और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। पुलिस को लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें अपनी जान का खतरा बना हुआ है।
परिवार के विरोध के बावजूद किया विवाह
मामले में सामने आया कि दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और प्रेम संबंध में थे। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने 27 फरवरी 2026 को आर्य समाज मंदिर में विवाह किया और बाद में विधिवत पंजीकरण भी कराया। दोनों के बालिग होने के कारण यह विवाह कानूनन वैध है।
कोर्ट ने दिया स्पष्ट संदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है। अदालत ने यह भी कहा कि अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह सामाजिक रूप से स्वीकार्य हैं और ऐसे दंपतियों को किसी भी प्रकार की धमकी या उत्पीड़न से सुरक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही संबंधित पक्षों को दंपति के वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने के निर्देश दिए गए हैं।


