सीजी भास्कर, 07 जुलाई : मानसून की पहली बारिश (Raipur Waterlogging) ने राजधानी रायपुर की तैयारियों की पोल खोल दी। शहर के कई इलाकों में जलभराव होने के बाद नगर निगम ने विशेष सामान्य सभा बुलाई, जो करीब 9 घंटे तक चली। बैठक में पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी बहस और हंगामा हुआ, लेकिन जलभराव की जिम्मेदारी किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं ली। सभी ने अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें लापरवाह बताया।
अफसरों पर फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा
विशेष सामान्य सभा में पेयजल, सफाई, अतिक्रमण, अवैध प्लॉटिंग और जलभराव (Raipur Waterlogging) जैसे मुद्दों पर 50 से अधिक पार्षदों ने अपनी बात रखी। एमआईसी सदस्यों से लेकर महापौर तक ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। पार्षदों का कहना था कि अधिकारी फील्ड में नहीं जाते, जिसके कारण समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता।
बैठक में लिए गए अहम फैसले
लंबी चर्चा के बाद निगम ने भविष्य में जलभराव (Raipur Waterlogging) रोकने के लिए सभी प्रमुख नालों का सीमांकन कराने का निर्णय लिया। साथ ही नालों पर हुए अवैध कब्जों को हटाने, सफाई व्यवस्था मजबूत करने, अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई और पेयजल व्यवस्था में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर सहमति बनी।
पार्षदों ने उठाए अपने-अपने वार्डों के मुद्दे
पार्षद प्रदीप वर्मा ने कहा कि पेयजल, नाली सफाई और अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार आवेदन देने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अंजली गोलछा ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल फाइलों तक सीमित हैं और आपात स्थिति में फोन तक नहीं उठाते। शेख मुशीर ने मौदहापारा में सफाई कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया, जबकि अर्जुमन ढेबर ने कहा कि जनप्रतिनिधि लगातार फील्ड में रहते हैं, लेकिन अधिकारी कार्यालय से बाहर नहीं निकलते।
भुगतान नहीं मिलने पर ठेकेदारों का प्रदर्शन
विशेष सामान्य सभा के दौरान नगर निगम मुख्यालय के बाहर ठेकेदार संघ ने प्रदर्शन किया। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि महीनों से भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि भूमिपूजन और अन्य कारणों से काम रुकवाया जाता है, जिससे परियोजनाएं देर से पूरी होती हैं और इसका ठीकरा ठेकेदारों पर फोड़ दिया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष ने फाड़ी जवाब की प्रति
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि नालों की सफाई समय पर नहीं होने के कारण शहर जलमग्न हुआ। उन्होंने अधिकारियों के लिखित जवाब को खानापूर्ति बताते हुए सदन में उसकी प्रति फाड़ दी और महापौर तथा एमआईसी को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
महापौर बोलीं- 15 साल के कुप्रबंधन का असर
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि शहर आज पिछले 15 वर्षों के कुप्रबंधन का खामियाजा भुगत रहा है। उन्होंने कहा कि नालों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण लंबे समय से होते रहे हैं, जबकि अवैध नल कनेक्शनों के कारण नियमित उपभोक्ताओं तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने जलभराव, सफाई और अतिक्रमण के मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।



