सीजी भास्कर, 09 जुलाई : हाथियों का हमला (Elephant Attack) रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। भोजन की तलाश में गांवों तक पहुंचे हाथियों के दल ने दो रातों में 8 मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि तीन किसानों की धान की फसल और थरहा (नर्सरी) रौंद दी। घटना के बाद वन विभाग (Forest Department) ने प्रभावित गांवों में अलर्ट जारी कर राहत और मुआवजा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार कापू रेंज की लिप्ती बीट अंतर्गत ग्राम चितामाड़ा, पखनाकोट और कमरई में सोमवार रात हाथियों का दल गांव में घुस आया। हाथियों ने बैसाखु लकड़ा, संजय लकड़ा, दीपक केरकेट्टा, परमेश्वर मिंज, सिरिल मिंज समेत कई ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंचाया।
मंगलवार रात भी हाथियों का उत्पात जारी रहा। पखनाकोट गांव में भूखन मिंज और परसराम मिंज के मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा किसानों के धान के थरहा और खड़ी फसल को भी रौंद दिया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
वन विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षति का सर्वे शुरू किया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है।
जिले में 135 हाथियों की मौजूदगी
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक रायगढ़ जिले में इस समय कुल 135 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं। इनमें 114 हाथी धरमजयगढ़ वन मंडल में सक्रिय हैं, जबकि 21 हाथी रायगढ़ वन मंडल क्षेत्र में मौजूद हैं। लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
बस्तर में बाघ और कांकेर में तेंदुए की भी हलचल
इधर बस्तर के कुरंदी गांव में करीब एक दशक बाद बाघ की मौजूदगी की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों के पास बड़े पंजों के ताजा निशान मिलने के बाद वन विभाग ट्रैप कैमरों और वैज्ञानिक जांच के जरिए पुष्टि करने में जुटा है।
वहीं कांकेर जिले के ढेकलावन और गट्टागुड़ूम क्षेत्र में तेंदुआ अब भी वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। पिंजरे में बकरे का चारा रखने के बावजूद तेंदुआ उसमें नहीं फंसा। कैमरों में उसकी गतिविधि दर्ज हुई है और वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।



