सीजी भास्कर, 09 जुलाई : खेतों की घटती उर्वराशक्ति और बढ़ती खेती लागत के बीच महासमुंद जिले के किसान अब हरी खाद (ढैंचा) को अपनाकर टिकाऊ खेती (Green Manure) की ओर बढ़ रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग ने खेत बचाओ अभियान के तहत जिले के सभी विकासखंडों में किसानों को ढैंचा की खेती के लिए जागरूक किया है। अभियान के तहत जिले में 376 हेक्टेयर क्षेत्र में 103 क्विंटल ढैंचा बीज का वितरण किया गया है। इससे 813 किसान हरी खाद तकनीक का लाभ ले रहे हैं।
ढैंचा से खेतों को मिल रही नई ताकत
कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानों ने ढैंचा की बुवाई कर फूल आने से पहले इसे खेत में पलट दिया है। इसके सड़ने के बाद बनने वाली जैविक खाद से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और उसी खेत में धान सहित अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन किया जाएगा।
विकासखंड बसना के ग्राम बड़ेसाजापाली के किसान हिमांशु बंजारे ने बताया कि उन्होंने अपने 0.80 हेक्टेयर खेत में ढैंचा की हरी खाद फसल लगाई है। उनका कहना है कि जैविक खेती अपनाने से खेती की लागत कम होगी और मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर बनेगा।
इसी तरह पिथौरा विकासखंड के ग्राम कौहाकुड़ा के किसान रूक्मण नायक ने 7 एकड़ भूमि में और बसना के ग्राम भौंरादादर के किसान गोकुल पटेल ने अपने खेत में ढैंचा की बुवाई की है।
रासायनिक खाद पर निर्भरता होगी कम
हरी खाद का उपयोग करने वाले किसानों का कहना है कि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और खेती की लागत में कमी आएगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा एक दलहनी हरी खाद फसल है, जो वातावरण से नाइट्रोजन को मिट्टी में पहुंचाने में सहायक होती है। इससे फास्फोरस, जिंक और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है।
ढैंचा के सड़ने से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे हवा और पानी का बेहतर संचार होता है। इससे फसलों की जड़ों का विकास अच्छा होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।
सूखे में भी फसलों को मिलेगा फायदा
हरी खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है। जैविक पदार्थ मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखते हैं, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और फसलें कम पानी की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
कृषि विभाग की किसानों से अपील
उप संचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने किसानों से अपील की है कि धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई और अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें।
उन्होंने कहा कि हरी खाद अपनाने से मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वराशक्ति बनी रहती है, रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम होता है और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलता है।



