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Mahadev App : सट्टे के जाल में किसकी रही भूमिका, नए आरोप पत्र के बाद कई नाम फिर चर्चा में

By Newsdesk Admin
10/07/2026
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सीजी भास्कर, 10 जुलाई। देश के चर्चित ऑनलाइन सट्टा मामले में एक बार फिर हलचल तेज (Mahadev App) हो गई है। नए आरोप पत्र अदालत में पेश होने के बाद जांच का दायरा और चर्चाओं का बाजार दोनों गर्म हैं। भोपाल से जुड़े दो कारोबारियों के नाम सामने आने के बाद लोगों की नजर अब इस पूरे नेटवर्क और उसकी परतों पर टिक गई है।

Contents
  • छह नए आरोप पत्र अदालत में पेश Mahadev App
  • भोपाल के कारोबारी जांच के घेरे में
  • संरक्षण राशि देने का भी आरोप
  • डिजिटल प्रचार से बढ़ाया नेटवर्क
  • देशभर में लगातार जारी कार्रवाई
  • नेताओं और अधिकारियों के नाम नहीं

जांच एजेंसी की ताजा कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि अवैध सट्टे का नेटवर्क केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि उससे जुड़े कई सहयोगी भी अलग अलग जिम्मेदारियां निभा रहे थे। इसी बीच संरक्षण राशि दिए जाने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

छह नए आरोप पत्र अदालत में पेश Mahadev App

देश के बहुचर्चित ऑनलाइन सट्टा मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में छह नए आरोप पत्र दाखिल किए हैं। इनमें एक आरोप पत्र भ्रष्टाचार से जुड़े मामले का है, जबकि पांच आरोप पत्र अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से संबंधित हैं। इन आरोप पत्रों में असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी के साथ भोपाल के रैपिड ट्रैवल एजेंसी संचालक विशाल आहूजा और धीरज आहूजा को भी आरोपी बनाया गया है।

भोपाल के कारोबारी जांच के घेरे में

जांच के अनुसार आहूजा बंधु महादेव सट्टा एप के प्रमोटरों, उनके परिजनों और सहयोगियों की देश और विदेश की हवाई टिकटों की व्यवस्था करते थे। टिकट बुकिंग के लिए एयरलाइन और ट्रैवल कंपनियों के वॉलेट में पहले से राशि जमा कराई जाती थी, जिससे जरूरत के अनुसार टिकट जारी किए जाते थे। बताया गया है कि दोनों कारोबारी भोपाल के लालघाटी क्षेत्र के निवासी हैं और रैपिड ट्रैवल्स का संचालन करते हैं।

संरक्षण राशि देने का भी आरोप

जांच एजेंसी का दावा है कि ऑनलाइन सट्टे से कमाई गई रकम फर्जी बैंक खातों के माध्यम से विदेश भेजी (Mahadev App) जाती थी। आरोप है कि इस नेटवर्क के संचालन और उसे संरक्षण दिलाने के लिए कुछ अधिकारियों तक संरक्षण राशि भी पहुंचाई जाती थी। मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी एजेंसी ने अतिरिक्त साक्ष्य अदालत में पेश किए हैं।

डिजिटल प्रचार से बढ़ाया नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क को फैलाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापनों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। एजेंसी अब पश्चिम एशिया में छिपे आरोपियों को भारत लाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में चार आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

देशभर में लगातार जारी कार्रवाई

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय अब तक देशभर में 175 से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर चुका है। जांच के दौरान 4336 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति, नकदी और आभूषण कुर्क किए जा चुके हैं।

आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, आर्थिक अपराध अन्वेषण इकाई और केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के बावजूद अलग अलग नामों से नई ऑनलाइन सट्टा बुक संचालित होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। इसी क्रम में 66 अन्य लोगों के खिलाफ पांच अतिरिक्त आरोप पत्र भी दाखिल किए गए हैं, जिनमें कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट के कई सदस्य शामिल हैं।

नेताओं और अधिकारियों के नाम नहीं

यह मामला पहले अन्य जांच एजेंसियों के पास था, जहां जांच के दौरान कई नेताओं और पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आने की बात कही (Mahadev App) गई थी। बाद में मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया और दिसंबर 2024 में विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

करीब डेढ़ वर्ष की जांच के बाद दाखिल आरोप पत्र में वही आरोपी शामिल किए गए हैं, जिनके नाम पहले से अन्य एजेंसियों की जांच में सामने आ चुके थे। जांच के दौरान कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के ठिकानों पर तलाशी और पूछताछ भी हुई, लेकिन मौजूदा आरोप पत्र में किसी भी नेता या अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। इस कारण जांच के दायरे और उसके निष्कर्षों को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।

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