सीजी भास्कर, 25 अगस्त : छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ सुविधाओं की जांच नहीं होगी, बल्कि शिक्षक कैसे पढ़ा रहे हैं और बच्चे कितना सीख रहे हैं, इसकी भी जमीनी जांच की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने अध्ययन-अध्यापन की स्थिति जानने के लिए राज्य स्तरीय टीम बनाई है। पहले चरण में दुर्ग समेत पांच जिलों को चुना गया है। टीम कक्षा में बैठकर शिक्षकों के पढ़ाने और बच्चों के सीखने की प्रक्रिया का आकलन करेगी।
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कक्षा में बैठकर देखेंगे शिक्षक कैसे पढ़ा रहे
दुर्ग जिले में टीम कम से कम तीन सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान टीम सीधे कक्षा में बैठेगी और शिक्षक के पढ़ाने के तरीके को देखेगी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि बच्चे पढ़ाए जा रहे विषय को कितना समझ पा रहे हैं।
इस दौरान तीसरी, छठवीं और नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को विशेष रूप से केंद्र में रखा जाएगा। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान समेत अन्य विषयों में बच्चों की समझ और दक्षता परखी जाएगी। टीम विद्यार्थियों से सीधे बातचीत भी करेगी।
सुविधाओं के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता भी जांचेंगे
निरीक्षण के दौरान स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी देखी जाएगी। हालांकि इस बार मुख्य फोकस शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और बच्चों की सीखने की क्षमता पर रहेगा। विभाग का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है।
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निरीक्षण के बाद बनेगी सुधार की कार्ययोजना
राज्य स्तरीय टीम में विभागीय अधिकारियों के साथ विषय विशेषज्ञ, प्राचार्य, प्रधानपाठक और व्याख्याता शामिल होंगे। निरीक्षण के बाद स्कूलों को लाल या हरे रंग के संकेत के जरिए फीडबैक दिया जाएगा।
फीडबैक के आधार पर जिला और विकासखंड स्तर के अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें स्कूलों में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए सुधार की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके बाद योजना को समग्र शिक्षा के पास भेजा जाएगा।
दुर्ग समेत इन पांच जिलों में होगा निरीक्षण
पहले चरण में दुर्ग के अलावा रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले को भी निरीक्षण के लिए चुना गया है। इन जिलों में सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और बच्चों की सीखने की स्थिति का जमीनी आकलन किया जाएगा।
तीन तरह के स्कूलों का होगा चयन
दुर्ग जिले में निरीक्षण के लिए उच्च प्रदर्शन, औसत प्रदर्शन और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को शामिल किया जाएगा। इससे अलग-अलग स्तर के स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति की तुलना की जा सकेगी।
निरीक्षण के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किन स्कूलों में पढ़ाई बेहतर हो रही है और किन जगहों पर सुधार की जरूरत है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता (Chhattisgarh Education News) सुधारने के लिए निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
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शिक्षकों के पढ़ाने और बच्चों के सीखने पर रहेगा फोकस
सरकारी स्कूलों में अब केवल स्कूल भवन, सुविधाओं और संसाधनों की स्थिति देखना ही पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षक कक्षा में किस तरीके से पढ़ा रहे हैं और विद्यार्थी उस पढ़ाई को कितना समझ रहे हैं, इसकी भी जांच की जाएगी।
दुर्ग समेत पांच जिलों में होने वाला यह निरीक्षण शिक्षा की जमीनी स्थिति समझने और कमियों की पहचान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




