सीजी भास्कर, 11 जुलाई : कभी घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे अबूझमाड़ के कटेर गांव (PM Janman Road) तक पहुंचना बेहद कठिन था, लेकिन अब पक्की सड़क बनने से यहां के ग्रामीणों की जिंदगी बदलने लगी है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) के तहत डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर गांव तक 8.75 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग 8.56 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इस सड़क ने अबूझमाड़ के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है।
बारिश में कट जाता था गांव का संपर्क : PM Janman Road
कटेर गांव तक पहले केवल संकरी पगडंडियों के जरिए पहुंचा जा सकता था। बारिश के मौसम में ये रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते थे, जिससे ग्रामीणों को अस्पताल पहुंचने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार गंभीर मरीजों को समय पर इलाज भी नहीं मिल पाता था।
अब गांव तक पहुंच रही एम्बुलेंस और सरकारी सेवाएं
सड़क निर्माण के बाद अब एम्बुलेंस, शासकीय वाहन और अन्य जरूरी सेवाएं सीधे गांव तक पहुंच रही हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो सका है। वहीं, स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति भी बढ़ी है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है।
किसानों और वनोपज संग्राहकों को मिला बड़ा फायदा
नई सड़क बनने से सबसे अधिक लाभ किसानों और वनोपज संग्राहकों को मिला है। अब वे अपनी कृषि उपज और वनोपज को आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य विकास कार्यों के लिए निर्माण सामग्री पहुंचाना भी पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।

बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं को भी मिली रफ्तार
सड़क बनने के बाद क्षेत्र में बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था, लेकिन अब वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा अबूझमाड़ : PM Janman Road
कटेर गांव तक पहुंची यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर जीवन की नई संभावनाओं का रास्ता भी बन गई है। ग्रामीणों का मानना है कि सड़क बनने के बाद अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में विकास की रफ्तार तेज हुई है और आने वाले समय में इसका लाभ आसपास के अन्य गांवों को भी मिलेगा।



