सीजी भास्कर, 18 जुलाई। पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी (Harbhajan Singh) की है। अदालत ने साफ कहा कि किसी राजनीतिक दल को छोड़ने के बाद हुए विरोध प्रदर्शन को अपने आप जान और स्वतंत्रता के लिए खतरे का आधार नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा वापस लेने का निर्णय पहले ही समीक्षा प्रक्रिया के तहत लिया जा चुका था। इसलिए इसे राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

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सुरक्षा हटाने में राजनीतिक कारण नहीं Harbhajan Singh
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने कहा कि हरभजन सिंह की सुरक्षा हटाने का फैसला सिक्योरिटी रिव्यू कमेटी ने पहले ही कर लिया था। यह निर्णय उनके आम आदमी पार्टी छोड़ने से काफी पहले लिया गया था। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि सुरक्षा राजनीतिक कारणों से वापस ली गई।
विरोध प्रदर्शन को नहीं माना खतरा
अदालत ने कहा कि हरभजन सिंह के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन होना या उन्हें गद्दार लिखे पोस्टर लगाना अपने आप में जान और स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरे का प्रमाण नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रदर्शन हिंसक नहीं था, इसलिए केवल इसी आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा बहाल करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
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पहले से मिली हुई है वाई प्लस सुरक्षा Harbhajan Singh
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के तहत हरभजन सिंह को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के माध्यम से वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा पहले से उपलब्ध है। साथ ही जब भी वह पंजाब आते हैं, तब स्थानीय स्तर पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।
सुरक्षा बहाल करने की मांग की थी
हरभजन सिंह ने पंजाब पुलिस द्वारा 25 अप्रैल 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी राज्य सुरक्षा वापस ले ली गई थी। उनका तर्क था कि सुरक्षा बिना किसी नए खतरे के आकलन और उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना हटा दी गई।
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अदालत ने याचिका का किया निपटारा
अदालत ने रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों और राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए खतरे के आकलन पर विचार करने के बाद माना कि सुरक्षा हटाने की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समीक्षा के आधार (Harbhajan Singh) पर हुई थी। ऐसे में किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और इसी के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।


