सीजी भास्कर, 22 जुलाई : छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों (Road Accidents Chhattisgarh) पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पुलिस का काम केवल मवेशियों को सड़क से हटाना है या सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह भी पढे़ं : Mango Research : छत्तीसगढ़ में आम की 20 नई वैरायटी पर शोध, किसानों की बढ़ेगी आय
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में सामने आई लापरवाही
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट बिलासपुर द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुटाए गए आधिकारिक आंकड़े और रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सड़क हादसों (Road Accidents Chhattisgarh) को रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं हैं और नियमों के अनुसार हर महीने होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें भी नियमित रूप से आयोजित नहीं की जा रही हैं।
यह भी पढे़ं : Koriya Crime Case : प्रेम विवाह से नाराज होकर गर्भवती महिला के अपहरण व दुष्कर्म का आरोप, 2 गिरफ्तार
2025 में 6,967 मौतें, 2026 के पांच महीनों में 3,170 की जान गई
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में प्रदेश में 15,484 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 6,967 लोगों की मौत हुई और 13,156 लोग घायल हुए। वहीं वर्ष 2026 में 31 मई तक केवल पांच महीनों में 6,891 सड़क हादसों में 3,170 लोगों की जान जा चुकी है।
यह भी पढे़ं : Raipur Railway Ticket Checking : रायपुर रेल मंडल में सघन टिकट जांच, 121 यात्रियों से 78 हजार रुपये से अधिक जुर्माना
सरगुजा और कांकेर का उदाहरण देकर कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाई कोर्ट ने सरगुजा और कांकेर जिलों का उदाहरण देते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए। सरगुजा में एक वर्ष के दौरान 300 से अधिक लोगों की मौत के बावजूद सड़क सुरक्षा समिति की केवल एक बैठक हुई। वहीं कांकेर जिले में भी पूरे साल सिर्फ एक बैठक आयोजित की गई।
यह भी पढे़ं : Kushalpur Drain Project : निगम अधिकारियों की गैरहाजिरी से एनएचएआई की अहम बैठक टली
आवारा मवेशी और अवैध पार्किंग पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि बारिश के मौसम में राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर आवारा मवेशियों के बैठने से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। अदालत ने औद्योगिक क्षेत्रों और हाईवे पर ट्रकों की अवैध पार्किंग तथा ओवरलोडिंग को भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बताया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वजन जांचने वाली मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे नियमों का पालन नहीं हो रहा।
यह भी पढे़ं : BJP Chhattisgarh Meeting : भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक शुरू, महामंत्री शिव प्रकाश कर रहे अध्यक्षता
रायपुर में सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट
हाई कोर्ट में प्रदेश के 10 सबसे अधिक दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की सूची भी पेश की गई। इनमें सात स्थान अकेले रायपुर जिले में हैं। धरसींवा के सिलतरा से निको गेट तक का मार्ग, तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा प्रमुख दुर्घटना प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा कोरबा जिले का पाली-गझरा नाला मार्ग भी गंभीर ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है।
10 दिन में मांगा विस्तृत शपथपत्र
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस, एनएचएआई और जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे 10 दिनों के भीतर सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों, अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग पर की गई कार्रवाई, ब्लैक स्पॉट्स में सुधार और सड़क सुरक्षा के लिए तैयार समयबद्ध कार्ययोजना का विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करें।



