सीजी भास्कर, 29 जुलाई : छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच बीजापुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड में सक्रिय रहे 8 माओवादियों ने बुधवार को बीजापुर पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण (Bijapur Maoist Surrender) कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 3 डीबीसीएम (DBCM), 4 एसीएम (ACM) और एक जनमिलिशिया स्तर का माओवादी शामिल है।
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16 साल तक संगठन में रहा प्रवक्ता लच्छू
आत्मसमर्पण (Bijapur Maoist Surrender) करने वालों में लच्छू भी शामिल है, जो झारखंड संगठन में प्रवक्ता की भूमिका निभा रहा था। लच्छू ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। वह मूल रूप से बीजापुर ब्लॉक के सावनार गांव का निवासी है।
उसने बताया कि गांव के कई लोग पहले से संगठन में शामिल थे। उनके प्रभाव में आकर वह भी नक्सलियों के साथ चला गया। वर्ष 2014 से वह झारखंड में सक्रिय था।
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सुरक्षा बलों के दबाव से लिया फैसला Bijapur Maoist Surrender
लच्छू ने बताया कि सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई तथा छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया। उसने कहा कि लगातार सुरक्षा बलों के दबाव के कारण संगठन में बने रहना मुश्किल हो गया था। ऐसे में मुख्यधारा में लौटना ही बेहतर विकल्प लगा।
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अब खेती-किसानी कर बिताना चाहता है जीवन
आत्मसमर्पण के बाद लच्छू ने कहा कि अब वह अपने गांव लौटकर खेती-किसानी करेगा और सामान्य नागरिक की तरह जीवन बिताना चाहता है। उसने संगठन में सक्रिय अन्य माओवादियों से भी हथियार छोड़ने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
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झारखंड में अब भी सक्रिय हैं 15 से 20 माओवादी
लच्छू ने दावा किया कि झारखंड क्षेत्र में अभी भी 15 से 20 माओवादी सक्रिय हैं। हालांकि, लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण संगठन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उसके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में संगठन के लिए काम करना पहले की तुलना में काफी कठिन हो गया है।
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पुलिस ने बताया अभियान की बड़ी सफलता
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण इस बात का संकेत हैं कि नक्सली संगठन का जनाधार कमजोर हो रहा है। साथ ही सुरक्षा बलों के प्रभावी अभियान और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास जारी रहेंगे।
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