सीजी भास्कर, 06 अगस्त। बारिश की पहली अच्छी फुहार पड़ते ही धमतरी और आसपास के इलाकों के बाजारों में एक खास चीज की चर्चा शुरू (Wild Mushroom) हो जाती है। यह है देशी मशरूम, जिसे स्थानीय लोग फुटू के नाम से जानते हैं। जैसे ही इसकी आवक बढ़ती है, खरीदने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है। स्वाद के शौकीन लोग इसकी ऊंची कीमत की परवाह किए बिना इसे खरीदने पहुंच जाते हैं।
लेकिन इस स्वादिष्ट व्यंजन के बाजार तक पहुंचने की कहानी बेहद जोखिम भरी है। वनांचल के ग्रामीण घने जंगलों में अपनी जान दांव पर लगाकर इसे तलाशते हैं। हर बार मशरूम निकालने के दौरान जहरीले सांपों का खतरा उनके साथ चलता है, फिर भी आजीविका और परंपरा के कारण वे यह जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते।
यह भी पढ़ें : Investiture Ceremony : विद्यार्थी परिषद की नई टीम ने ली जिम्मेदारी, शपथ ग्रहण समारोह में गूंजा नेतृत्व और अनुशासन का संदेश

हजार से पंद्रह सौ रुपये किलो तक पहुंचती है कीमत
धमतरी के बाजारों में इन दिनों देशी मशरूम की अच्छी आवक हो रही है। इसकी कीमत करीब 1000 से 1500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। स्थानीय बाजारों में इसे छत्तीसगढ़ी शैली में छोटी छोटी झूड़ियों में बांधकर बेचा जाता है। एक झूड़ी की कीमत लगभग 100 से 150 रुपये तक रहती है, जिसे लोग हाथों हाथ खरीद लेते हैं।
दीमक के टीलों पर उगता है देशी मशरूम Wild Mushroom
ग्रामीणों के अनुसार यह देशी मशरूम जंगलों में दीमक के टीलों पर प्राकृतिक रूप से उगता है। इसी कारण इसे तलाशने के लिए घने जंगलों में जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।
यह भी पढ़ें : MNREGA Payment Update : मनरेगा श्रमिकों के खातों में पहुंचेगी लंबित मजदूरी राशि, भुगतान जारी
हर पल बना रहता है जहरीले सांपों का डर
बारिश के दौरान दीमक खाने के लिए कई बार जहरीले सांप भी उन्हीं टीलों में घुस जाते हैं, जहां मशरूम निकलता है। ऐसे में मशरूम निकालते समय सांप के काटने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद ग्रामीण सावधानी के साथ मशरूम एकत्र कर बाजार तक पहुंचाते हैं।
बारिश के मौसम में बढ़ जाती है मांग Wild Mushroom
देशी मशरूम का स्वाद पसंद करने वाले लोग हर साल मानसून का इंतजार करते हैं। बाजार में इसकी आवक शुरू (Wild Mushroom) होते ही खरीदार बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। सीमित उपलब्धता और बेहतरीन स्वाद के कारण यह बारिश के मौसम का सबसे पसंदीदा पारंपरिक खाद्य पदार्थ माना जाता है।
खबरें और भी हैं : Mahua Success Story : महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगी, वन धन योजना से बनीं आत्मनिर्भर
रिपोर्टर : रिजवान मेमन



