सीजी भास्कर, 30 जुलाई। दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि अदालत के पास सार्वजनिक परिसरों से बेदखली की वैधानिक प्रक्रिया पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। केंद्र ने दलील दी कि Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act (PP Act) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं हैं। (Delhi Gymkhana Club Case)
केंद्र ने PP Act के तहत वैधानिक प्रक्रिया का दिया हवाला : Delhi Gymkhana Club Case
केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी (Perpetual) लीज को कानूनी प्रक्रिया के तहत समाप्त किया जा चुका है। सरकार के अनुसार, लीज समाप्त होने के बाद क्लब का परिसर पर वैधानिक अधिकार नहीं रह जाता और एस्टेट ऑफिसर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस भी कानून के अनुरूप है।
सरकार ने कहा कि PP Act में बेदखली से जुड़े मामलों के लिए अलग वैधानिक व्यवस्था मौजूद है। यदि याचिकाकर्ताओं को नोटिस या कार्रवाई पर आपत्ति है तो वे एस्टेट ऑफिसर के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। केंद्र का तर्क है कि इस प्रक्रिया को बीच में रोकने का कोई आधार नहीं है।
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मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी
मामले में क्लब सदस्य विजय खुराना और कर्मचारियों की ओर से याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें एस्टेट ऑफिसर की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई 3 सितंबर तय की है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि 28 फरवरी 1928 की स्थायी लीज को उसकी शर्तों के तहत 22 मई 2026 को समाप्त किया गया। सरकार का कहना है कि यह भूमि अधिग्रहण का मामला नहीं, बल्कि लीज समझौते में दिए गए संविदात्मक अधिकारों के इस्तेमाल से जुड़ा मामला है। वहीं याचिकाकर्ताओं का दावा है कि बेदखली की कार्रवाई के कारण और प्रक्रिया पर सवाल हैं तथा इसकी न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए।
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