सीजी भास्कर, 10 जून : सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम नावापारा (Surajpur Land Scam ) में भूमि रिकॉर्ड की कथित गड़बड़ियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बंदोबस्त अभिलेखों में हुई त्रुटियों का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने किसानों की निजी जमीनों के साथ-साथ शासकीय भूमि की भी फर्जी तरीके से खरीद-बिक्री कर दी। सबसे गंभीर आरोप गांव के वर्ष 1954 में स्थापित प्राथमिक शाला खासपारा की भूमि के कथित विक्रय को लेकर लगाया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
मामले को लेकर गांव के सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1991-92 के बंदोबस्त त्रुटि सुधार कार्य के दौरान कई रिकॉर्ड गलत दर्ज हो गए थे, जिनका खामियाजा आज ग्रामीणों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार पीढ़ियों से जिन जमीनों पर खेती और निवास करते आ रहे हैं, उन्हीं भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड में अब विसंगतियां सामने आ रही हैं। इससे जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है।
सरकारी स्कूल की जमीन बेचने का गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने दावा किया कि रिकॉर्ड की गड़बड़ियों का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने शासकीय भूमि को भी निजी भूमि बताकर खरीद-बिक्री कर दी। आरोप है कि गांव के प्राथमिक विद्यालय खासपारा की भूमि भी इस कथित फर्जीवाड़े की जद में आ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो गांव की अन्य सार्वजनिक और शासकीय भूमि भी विवादों में घिर सकती है। इस कारण पूरे गांव में चिंता और असंतोष का माहौल है।
ग्रामसभा की अनुमति के बिना जमीन बिक्री पर रोक की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही बंदोबस्त रिकॉर्ड की सभी त्रुटियों का सुधार होने तक ग्रामसभा की अनुमति के बिना गांव की किसी भी भूमि की खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी और भविष्य में होने वाले कथित भूमि घोटालों पर रोक लग सकेगी।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि अभिलेखों का पुनः सत्यापन कराया जाए और जिन रिकॉर्डों में गड़बड़ी है, उन्हें सुधारने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उनका मानना है कि पारदर्शी जांच और रिकॉर्ड सुधार ही इस विवाद का स्थायी समाधान हो सकता है।



