नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बीच चीन पर आपदा की पूरी तस्वीर सामने आने से रोकने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े कुछ वायरल वीडियो सोशल मीडिया से हटाए गए हैं। वहीं, विदेशी पत्रकारों के लिए प्रभावित इलाकों में पहुंचना और स्थानीय लोगों से संपर्क करना भी मुश्किल बताया जा रहा है।
नेपाल और तिब्बत में आई इस आपदा में अब तक 676 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में सबसे ज्यादा जनहानि हुई है। वहां 669 लोगों की मौत और 2,426 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। चीन ने तिब्बत में सात लोगों की मौत और 550 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना दी है।
वायरल वीडियो हटाने का आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में बाढ़ और भूस्खलन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे। इनमें एक बॉर्डर क्रॉसिंग पर मलबे और पानी का तेज बहाव दिखाई दे रहा था। दावा है कि इनमें से एक वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। चीनी सरकारी मीडिया पर भी वीडियो के बजाय उसकी तस्वीर इस्तेमाल करने की बात कही गई है।
सरकारी मीडिया में राहत अभियान पर जोर
चीन के सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में मुख्य रूप से राहत और बचाव अभियान की जानकारी दी जा रही है। प्रभावित इलाकों में सेना और राहतकर्मियों की तैनाती के साथ ड्रोन और हेलिकॉप्टरों की मदद से बचाव अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ग्यिरोंग में बाढ़ प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
विदेशी पत्रकारों पर भी पाबंदियों के आरोप
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विदेशी पत्रकारों को तिब्बत के प्रभावित क्षेत्रों में जाने और स्थानीय लोगों से फोन पर बातचीत करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे तिब्बत में बाढ़ से हुए नुकसान की स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाना मुश्किल हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, तिब्बत चीन के सबसे संवेदनशील और कड़े नियंत्रण वाले क्षेत्रों में शामिल है। तिब्बत से जुड़ी सूचनाओं और मीडिया रिपोर्टिंग पर सरकारी नियंत्रण को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
नेपाल में हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बचाव दल अब तक 3,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई तेज और जानलेवा बाढ़ की लहर ग्लेशियर टूटने की घटना से जुड़ी थी। आपदा के बाद दोनों देशों में बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाया जा रहा है।




