सीजी भास्कर, 10 सितंबर : जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग (Adivasi Release Signature Campaign) को लेकर सुकमा में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है। अभियान के जरिए लंबे समय से जेल में बंद आदिवासियों और उनके परिवारों की परेशानियों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर परिवारों की मांग के समर्थन में अपनी सहमति जताई।
सुकमा जिले के कोंटा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मिलमपल्ली के तिम्मापुरम गांव से अभियान की शुरुआत हुई। इस दौरान जेल में बंद आदिवासियों के परिजनों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। कई परिवारों ने बताया कि उनके पति, बेटे और अन्य परिजन लंबे समय से जेल में हैं और वे अब भी उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
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परिजनों ने साझा किया दर्द
हस्ताक्षर अभियान (Adivasi Release Signature Campaign) के दौरान कई महिलाएं अपने परिजनों की जल्द रिहाई की उम्मीद में भावुक नजर आईं। परिवारों का कहना है कि लंबे समय से किसी सदस्य के जेल में रहने के कारण उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
परिजनों के सामने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ अपने रिश्तेदारों की कानूनी लड़ाई लड़ने की चुनौती भी बनी हुई है। इसी वजह से अभियान के जरिए सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
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निष्पक्ष जांच की मांग
सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष बेको हूंगा ने कहा कि नक्सल मामलों के नाम पर बड़ी संख्या में आदिवासियों के जेल में बंद होने की बातें सामने आती रही हैं। उन्होंने ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है तो उसे जल्द न्याय मिलना चाहिए और रिहा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से जेल में बंद लोगों के परिवारों को आर्थिक और सामाजिक दिक्कतों के साथ कानूनी लड़ाई की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। आदिवासियों की रिहाई (Adivasi Release Signature Campaign) के लिए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
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हरीश लखमा ने सरकार को घेरा
हरीश कवासी लखमा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है तो निर्दोष आदिवासियों के जेल में रहने का क्या औचित्य है। उन्होंने मांग की कि जिन आदिवासियों पर गंभीर आरोप साबित नहीं हुए हैं, उनके मामलों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें जल्द न्याय दिया जाए।
लखमा ने कहा कि यह केवल हस्ताक्षर अभियान (Adivasi Release Signature Campaign) नहीं है, बल्कि उन परिवारों की आवाज है, जिनका कोई अपना लंबे समय से जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा और उनके लिए न्याय की मांग लगातार उठाई जाएगी।
गांव-गांव जुटाया जाएगा समर्थन
हरीश कवासी लखमा ने कहा कि तिम्मापुरम से शुरू हुआ अभियान आगे भी जारी रहेगा। गांव-गांव जाकर लोगों से हस्ताक्षर कराए जाएंगे और आदिवासी समाज की सामूहिक मांग को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कई परिवार वर्षों से अपने पति, बेटे और अन्य परिजनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। निर्दोष आदिवासियों की रिहाई (Adivasi Release Signature Campaign) का मुद्दा सड़क से सदन तक मजबूती से उठाने की बात उन्होंने कही है। अभियान के जरिए सरकार से निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
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