सीजी भास्कर, रायपुर, 25 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के थानों में बच्चों की शिकायतों की सुनवाई के लिए बनाई गई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चार थानों की पड़ताल में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (Raipur Child Welfare Police Officer) मौके पर मौजूद नहीं मिले। वहीं, तीन थानों में बच्चों की शिकायतें सुनने के लिए अलग कक्ष भी नजर नहीं आया। ऐसे में नाबालिगों और उनके परिजनों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी हो सकती है।
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पुरानी बस्ती में कुर्सी खाली
पुरानी बस्ती थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (Child Welfare Police Officer) की जिम्मेदारी संभाल रहे एसआई दूसरी ड्यूटी पर थे। यहां बच्चों की शिकायतों के लिए अलग कक्ष भी नहीं मिला। पड़ताल के दौरान एक महिला अपने दुधमुंहे बच्चे को लेकर संबंधित अधिकारी से मिलने के लिए भटकती रही। थाने में अन्य लोगों के सामने ही शिकायतें सुने जाने की स्थिति दिखाई दी।
थाना प्रभारी अनंत सोनी ने बताया कि अधिकारी नियुक्त हैं, लेकिन उन्हें दूसरी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। बच्चों से जुड़े मामलों में सादी वर्दी में कार्रवाई की जाती है।
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गंज और गोलबाजार में भी कमी
गंज थाने में पड़ताल के दौरान बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (Child Welfare Police Officer) मौजूद नहीं थे। उनके नाम का बोर्ड और अलग कक्ष भी दिखाई नहीं दिया। वहां मौजूद पुलिसकर्मी वर्दी में शिकायतें सुन रहे थे। थाना प्रभारी दीपक पासवान ने बताया कि अधिकारी नियुक्त हैं और बच्चों से संबंधित शिकायतें सुनने के साथ आरोपियों से पूछताछ भी करते हैं।
गोलबाजार थाने में भी संबंधित अधिकारी नहीं मिले और बच्चों की सुनवाई के लिए अलग कक्ष नजर नहीं आया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ही नाबालिगों की शिकायत सुनते हैं। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि एएसआई मुकेश यदु बाल कल्याण पुलिस अधिकारी हैं और उनके लिए थाने की ऊपरी मंजिल पर कक्ष बनाया गया है।
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खमतराई में अधिकारी अनुपस्थित
खमतराई थाने के पास संवेदना कक्ष बनाया गया है, जहां महिला एसआई की ड्यूटी रहती है। हालांकि, पड़ताल के दौरान संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं थीं। थाने के भीतर अन्य पुलिसकर्मी शिकायतें सुनकर रिपोर्ट दर्ज कर रहे थे। थाना प्रभारी जितेंद्र जायसवाल ने बताया कि एसआई ज्योति सिंह बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (Child Welfare Police Officer) हैं और महिलाओं तथा बच्चों से संबंधित शिकायतें सुनती हैं।
कानून में क्या है प्रावधान
अधिवक्ता पराग गाडिया के मुताबिक, किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत प्रत्येक थाने में कम से कम एक बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (Juvenile Justice Act 2015) नामित करना जरूरी है। अधिकारी का पद एएसआई या उससे ऊपर का होना चाहिए। जरूरत के अनुसार अलग-अलग शिफ्ट के लिए एक से अधिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। जिले में विशेष किशोर पुलिस इकाई की व्यवस्था भी जरूरी है।
बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशील व्यवहार और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। अधिकारी की अनुपस्थिति में शिकायत सुनने और बच्चों को उचित सहायता देने की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी अहम है।
डीसीपी बोले, सभी थानों में नियुक्ति
डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल ने बताया कि सभी थानों से नाम भेजे जाते हैं और उसी आधार पर बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। इन अधिकारियों को बच्चों से जुड़े अपराधों के अलावा अन्य मामलों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों से संबंधित शिकायत आने पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सादी वर्दी में सुनवाई की जाती है। हालांकि, पड़ताल में सामने आई स्थिति ने अधिकारियों की उपलब्धता और बच्चों के लिए अलग सुनवाई व्यवस्था (Raipur Police Child Safety) को लेकर सवाल खड़े किए हैं।



