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Home » छत्तीसगढ़ की बुनियादी शिक्षा पर संकट के बादल, बच्चों की पढ़ाई की हालत बेहद खराब

छत्तीसगढ़ की बुनियादी शिक्षा पर संकट के बादल, बच्चों की पढ़ाई की हालत बेहद खराब

By Newsdesk Admin 17/07/2025
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सीजी भास्कर, 17 जुलाई |

Contents
तीसरी कक्षा में बच्चों का टेस्ट – भाषा और गणित में प्रदर्शन कमजोरलड़कियां लड़कों से आगे, गांव आगे शहर पीछेसरकारी स्कूलों ने मारी बाज़ी, प्राइवेट स्कूल पीछे

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ‘परख’ रिपोर्ट में प्रदेश की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तीसरी कक्षा के 50% से ज्यादा छात्र 2 से 10 तक का पहाड़ा नहीं जानते और लगभग 45% बच्चे 99 तक की संख्याओं को क्रम में नहीं रख पाते।

रिपोर्ट के अनुसार, एससी वर्ग के छात्र अन्य वर्गों की तुलना में भाषा, गणित और सामान्य ज्ञान में कमजोर हैं। वहीं, गांवों के बच्चे शहरों के बच्चों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं — खासकर भाषा और कैलकुलेशन में।

तीसरी कक्षा में बच्चों का टेस्ट – भाषा और गणित में प्रदर्शन कमजोर

भाषा (Language):
छत्तीसगढ़ के बच्चों ने भाषा विषय में औसतन 59% स्कोर किया, जो राष्ट्रीय औसत (64%) से 5% कम है। इसका मतलब है कि लगभग 40% बच्चे सामान्य शब्दों, कहानियों और सूचनाओं को ठीक से नहीं समझ पा रहे।

  • कैटेगरी 1: डेली यूज़ के शब्द – 64% छात्र ही समझ पाए
  • कैटेगरी 2: शॉर्ट स्टोरी की समझ – 67% बच्चों को ही स्टोरी लाइन और संदेश समझ में आया
  • कैटेगरी 3: सूचना पढ़ने की क्षमता (जैसे समाचार) – सिर्फ 55% ही सही समझ पाए

गणित (Maths):
गणित में प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन अब भी सुधार की जरूरत है। यहां बच्चों का औसत स्कोर 57% रहा, जबकि नेशनल एवरेज 60% था।

  • संख्या क्रम (1–99): 55% बच्चे ही सही से अरेंज कर पाए
  • 100 रुपये का लेनदेन: सिर्फ 46% बच्चे ही कर पाए
  • समय की गणना (घंटा, दिन, हफ्ता): 57% छात्रों को ही समझ आया

लड़कियां लड़कों से आगे, गांव आगे शहर पीछे

रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ की छात्राएं भाषा और गणित दोनों में लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

  • भाषा में लड़कियों का स्कोर राष्ट्रीय औसत से 4% कम, जबकि लड़कों का 5% कम
  • गणित में लड़कियां सिर्फ 2% पीछे, लड़के 4% पीछे

ग्रामीण बनाम शहरी स्कूली बच्चे:
गांव के बच्चे भाषाई समझ और कैलकुलेशन में शहरी बच्चों से बेहतर हैं। जहां ग्रामीण छात्रों का लैंग्वेज स्कोर नेशनल से 4% नीचे है, वहीं शहरी छात्रों का 5% नीचे।

सरकारी स्कूलों ने मारी बाज़ी, प्राइवेट स्कूल पीछे

सर्वे से साफ है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में आगे हैं:

  • भाषा में सरकारी स्कूल – 4% नेशनल औसत से पीछे
  • प्राइवेट स्कूल – 5% पीछे
  • गणित में दोनों बराबर – 3% नीचे

केंद्रीय विद्यालय (केवी) ने राज्य में सबसे बेहतर परफॉर्म किया। मैथ्स में केवी स्कूल के बच्चे सिर्फ 1% पीछे हैं, जबकि भाषा में 4% पीछे हैं।

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