रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए रेलवे द्वारा महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से कोच आरक्षित किए गए हैं। लेकिन कुछ यात्री इन विशेष नियमों की अनदेखी कर अपने फायदे के लिए इन डिब्बों पर कब्जा कर लेते हैं। गुरुवार को इसी तरह की स्थिति बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत सामने आई, जब आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) ने गोंदिया-झारसुगुड़ा और झारसुगुड़ा-गोंदिया मेमू पैसेंजर ट्रेनों में औचक जांच अभियान चलाया।
महिला और दिव्यांग कोच में थे सामान्य यात्री
जांच के दौरान आरपीएफ को महिला कोच में पुरुष यात्री और दिव्यांग कोच में सामान्य यात्रियों का जमावड़ा मिला। सभी यात्री पूरी तरह सक्षम थे, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इन आरक्षित कोचों में यात्रा कर रहे थे। यह न केवल रेलवे कानून का उल्लंघन है, बल्कि वास्तविक हकदार यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर भी सीधा असर डालता है।
20 यात्रियों पर केस दर्ज, पांच ऑटो जब्त
आरपीएफ ने कुल 20 यात्रियों को कोच से हटाया और उन्हें संबंधित आरपीएफ पोस्ट लाकर कार्रवाई की गई।
- महिला कोच में बैठे पुरुषों पर रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत मामला दर्ज किया गया।
- दिव्यांग कोच में बैठे सामान्य यात्रियों पर धारा 155 के तहत कार्रवाई की गई।
इसके अलावा स्टेशन क्षेत्र में नो-पार्किंग जोन में खड़े पांच ऑटो को जब्त करते हुए चालकों पर भी केस दर्ज किया गया।
यात्रियों के लिए चेतावनी: नियम तोड़ा तो कार्रवाई तय
आरपीएफ अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे रेलवे द्वारा बनाए गए कोच आरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन करें। महिला और दिव्यांग यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाए गए कोच में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने पर कानूनी कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता।





