सीजी भास्कर, 2 सितंबर : मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित इसास बैंक में 11 अगस्त को हुई डकैती की साजिश छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की जेल में रची गई थी। यहां पर जबलपुर का एक कुख्यात बदमाश और बिहार का अपराधी बंद थे।
दोनों ने मिलकर डकैती की साजिश (Jabalpur Bank Robbery Conspiracy) तैयार की थी। जेल से बाहर आने के बाद इन अपराधियों ने अपने साथियों की मदद से वारदात को अंजाम दिया।इस घटना में बैंक प्रबंधक की कनपटी पर बंदूक टिकाकर दिनदहाड़े लॉकर से 14.875 ग्राम सोना और पांच लाख आठ हजार 675 रुपये की नकदी लूट ली गई थी। पुलिस जांच में पाटन के ग्राम उड़ना निवासी रईस लोधी उर्फ रहीस का नाम सामने आया। छानबीन में यह स्पष्ट हुआ कि रईस पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है और कुछ समय पहले रायगढ़ जेल में बंद था।
यहीं पर उसकी मुलाकात गया, बिहार निवासी कुख्यात अपराधी राजेश दास उर्फ आकाश दास से हुई, जो पहले से बैंक डकैती के मामले में सजा काट रहा था।जांच में सामने आया कि जेल से रिहा होने के बाद राजेश ने अपने साथियों के साथ जबलपुर में सक्रियता दिखाई। इस दौरान रईस ने उन्हें पाटन क्षेत्र में किराए का मकान दिलवाया। यहीं पर बैठकर डकैती की साजिश (Jabalpur Bank Robbery Conspiracy) को अंतिम रूप दिया गया। वारदात के बाद लूट का सोना और नकदी आपस में बांटकर सभी आरोपी अलग-अलग ठिकानों पर छिप गए।
पुलिस ने लगातार सुराग जुटाए और कड़ियां जोड़ते हुए मुख्य सरगना राजेश दास को बिहार के गया से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, रईस लोधी की संलिप्तता की भी पुष्टि हुई है। पुलिस का मानना है कि यह पूरा मामला डकैती की साजिश (Jabalpur Bank Robbery Conspiracy) का संगठित रूप है, जिसने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।





