सीजी भास्कर, 19 सितंबर। सरकारी स्कूलों की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई। जब अचानक निरीक्षण हुआ तो न तो प्राचार्य मौजूद थे और न ही शिक्षक। स्कूल की स्थिति देखकर प्रशासनिक अमला भी दंग रह गया। बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की साफ-सफाई दोनों ही सवालों के घेरे में आ गए।
दरअसल, बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने हाई स्कूल का आकस्मिक निरीक्षण (School Inspection) किया। उनके साथ जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान पता चला कि प्रभारी प्राचार्य रमेश साहू और शिक्षक निर्मल शर्मा बिना किसी स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित थे। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को दोनों के खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
गंदगी पर गुस्सा और स्वच्छता अभियान का आदेश
स्कूल के अंदर और बाहर फैली गंदगी देखकर कलेक्टर ने तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने आदेश दिया कि विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर पूरे परिसर को साफ किया जाए। कलेक्टर का कहना था कि स्कूल बच्चों का मंदिर होता है और यहां गंदगी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इस आकस्मिक निरीक्षण (School Inspection) ने साफ कर दिया कि लापरवाही पर अब सख्ती होगी।
बच्चों से संवाद और पढ़ाई की जांच
कलेक्टर सीधे कक्षाओं में पहुंचे और बच्चों से सवाल पूछे। नवमीं कक्षा में सामान्य अंग्रेजी और दसवीं में गणित की पढ़ाई चल रही थी। जब कलेक्टर ने सामान्य सवाल पूछे तो बच्चे संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। अंग्रेजी पढ़ने और हिज्जे बोलने में भी विद्यार्थियों को कठिनाई हो रही थी। इस दौरान कलेक्टर ने बच्चों से कहा कि पढ़ाई को केवल स्कूल तक सीमित न रखें बल्कि घर में भी नियमित रूप से पाठ को दोहराएं।
गणित के शिक्षक बने कलेक्टर
दसवीं की कक्षा में कलेक्टर खुद गणित के शिक्षक (School Inspection) बन गए। उन्होंने पाईथागोरस प्रमेय को आसान भाषा में समझाया और उदाहरण देकर नियम की व्याख्या की। बच्चों ने रुचि के साथ कलेक्टर की बात सुनी। उन्होंने छात्रों से उनके भविष्य के लक्ष्यों और करियर की योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि हर बड़े इंसान की सफलता उसके सपनों और मेहनत का नतीजा होती है।
प्रेरणादायी संदेश
कलेक्टर ने बच्चों से कहा कि जीवन का लक्ष्य तय करना जरूरी है। बिना लक्ष्य के मेहनत दिशा हीन हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि सफलता पाने के लिए पढ़ाई के साथ खेलकूद और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। पढ़ाई और खेलकूद के बीच संतुलन बनाना ही असली शिक्षा है। इस आकस्मिक निरीक्षण (School Inspection) का उद्देश्य न केवल शिक्षकों की जवाबदेही तय करना था बल्कि बच्चों को मोटिवेट करना भी था।





